शिक्षा का अधिकार नहीं तो एफआईआर

नागपुर।
गरीब व पिछड़े वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में अनिवार्य 25 प्रतिशत आरक्षण को लेकर प्रशासन सुस्त व स्कूल मनमानी रवैया अपनाए हुए हैं। अब शिक्षा विभाग ने दो फरवरी से कठोर कार्रवाई के साथ स्कूल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन दे रहा है।
केंद्रीय पद्घति संभव नहीं
आरटीई कार्यकर्ता, समाजसेवी संगठन एवं कुछ राजनीतिक पार्टियां केंद्रीय चयन प्रक्रिया के माध्यम से विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाने की मांग कर रही हैं। केंद्रीय चयन पद्घति की वकालत पहले प्राथमिक शिक्षा विभाग द्ïवारा की गई थी, लेकिन अब जटिलताओं का हवाला देकर इसे अपनाने से इनकार किया जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूलों को 25 प्रतिशत सीटें भरना बंधनकारी है, लिहाजा दो फरवरी से शिक्षा अधिकारी स्कूलों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे। जिन स्कूलों की प्रक्रिया में दोष पाया जाएगा, उनके खिलाफ निकटतम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
फॉर्म उपलब्ध नहीं
फॉर्म बांटने की प्रक्रिया 11 जनवरी से शुरू हो गई थी, लेकिन 15 दिनों बाद भी अभिभावकों तक यह नहीं पहुंच पा रही है। 30 जनवरी तक अनुदानित व बिना-अनुदानित शालाओं में प्रवेश के लिए अर्जियों के वितरण व इसी दौरान अर्जियों को स्वीकार करने की भी जानकारी दी गई थी, लेकिन काम शुरू ही नहीं हुआ है। इसका सीधा खामियाजा गरीब पालकों व पिछड़ी जाति के बच्चों क ा उठाना पड़ रहा है। आरटीई से संबधित किसी प्रकार के बैनर या नोटिस भी नहीं दिखते।






