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जलगांव की मिट्टी पर होगा फुटबाल वर्ल्ड कप

Bhaskar News | Dec 09, 2012, 05:16AM IST
जलगांव की मिट्टी पर होगा फुटबाल वर्ल्ड कप

कतर की राजधानी दोहा में 2022 में होने वाले  फीफा वर्ल्ड कप के स्टेडियम के निर्माण के लिए रेत, सीमेंट और अन्य सामग्री महाराष्ट्र के जलगांव से भेजी जा रही है। फिलहाल करीब तीन सौ करोड़ की निर्माण सामग्री का सालाना निर्यात हो रहा है।


 




फीफा कप पहली बार किसी अरब देश  में आयोजित किया जा रहा है। 50 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले दोहा और अल रेयान में फुटबॉलप्रेमियों के लिए एयरकंडीशंड स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। जलगांव की बलाई न्यूट्रिक्स कंपनी हर महीने 10 हजार मीट्रिक टन निर्माण सामग्री भेज रही है।


 


इस कंपनी के मालिक राजेंद्र बलाई ने भास्कर को बताया कि जलगांव की रेत काफी मोटी है जो मजबूत निर्माण में मदद करती है। इसी वजह से मटेरियल एक्सपोर्ट करने का मौका उन्हें ही मिला। वे जलगांव से गिरणा नदी की रेत और फ्लाई ऐश दोहा भेज रहे हैं।


 


दुबई के कई होटल, मॉल्स, और बहुमंजिला इमारतों में इनका इस्तेमाल पहले से किया जाता रहा है। स्टेडियम व मॉल्स जैसे मेगास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाले सीमेंट में 40 फीसदी तक फ्लाई ऐश मिलाई जाती है। भुसावल तहसील के दीपनगर थर्मल पावर स्टेशन की फ्लाई ऐश की मांग भी भरपूर है।


 


 


निर्माण का काउंटडाउन


 


12 : एयरकंडीशंड स्टेडियम


05 : हजार मीट्रिक टन रेत


10 : हजार मीट्रिक टन फ्लाई एश


300 : करोड़ की विदेशी मुद्रा


 

 


... इनमें से नौ तो हैं पोर्टेबल


 


फीफा कप के लिए नौ ऐसे पोर्टेबल स्टेडियम बनने वाले हैं, जिन्हें आयोजन के बाद खोल कर ले जाया जाएगा। गरीब देशों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए इनका इस्तेमाल होगा। यह स्टेडियम बहुत ज्यादा गर्म मौसम में भी भीतर से यूरोप जैसे ठंडे और आरामदेह रहेंगे।


 



कतर सरकार की ओर से अमेरिका की सीएचटूएम कंपनी को स्ट्रैटजिक पार्टनर के तौर पर यह जिम्मेदारी दी गई है। लंदन ओलिंपिक की तैयारियों का जिम्मा भी इसी कंपनी पर था।


 


 


नए स्टेडियम के डिजाइन बन रहे हैं। सड़क, होटल, मॉल, मेट्रो रेल जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े बड़े निर्माण शुरू हो गए हैं। आमतौर पर यह टूर्नामेंट जून-जुलाई में होता हैं। उस समय कतर का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक होता है।


 



कुल 12 स्टेडियम तैयार होंगे। इनमें से तीन पुराने हैं। नौ नए बनेंगे। आयोजन होने के बाद यहां इनकी कोई जरूरत नहीं रह जाएगी। लिहाजा अमेरिकी कंपनी के साथ योजना बनाई जा रही है कि नए स्टेडियम पोर्टेबल हों।


 


खेलों के बाद इन्हें गरीब देशों में स्थापित किया जाएगा। इन नौ विशाल स्टेडियम को खोलने से करीब 20 स्टेडियम बन सकेंगे। इनमें सोलर एनर्जी के इस्तेमाल की भी योजना है।



 


 

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