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माले मुफ्त दिले बेरहम, सफेद लिबास में जारी कला काम

 
Source: Dainik Bhaskar News   |   Last Updated 03:32(10/02/12)
 
 
 
 
सरकार से आर्थिक सहयोग की आस में बोर्ड

वक्फ संबंधी कानून बनने के बाद इसकी मजबूती के लिए कोई खास पहल राज्य में नजर नहीं आ रही है। सेवानिवृत्त हो चुके मुख्य कार्यकारी अधिकारी को करीब 2 साल का विस्तार दे कर काम लिया जा रहा है। उनके साथ महज दो सदस्य हैं।

महाराष्ट्र में वर्ष 2002 में वक्फ बोर्ड के गठन के बाद हाल ही में बोर्ड ठप सा पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। नागपुर में तो लंबे अरसे से सीइओ का मोबाइल कोर्ट नहीं लग पाया है और न ही कोई सुनवाई हुई है। वक्फ बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र में वक्फ की 90 हजार एकड़ जमीन है, जिसमें से 70 प्रतिशत अतिक्रमित है।

पूर्व अल्पसंख्यक व औकाफ मंत्री हाजी अनीस अहमद के कार्यकाल में वक्फ बोर्ड मुख्यालय औरंगाबाद के अलावा पुणो और नागपुर में भी बोर्ड के सीईओ का मोबाइल कोर्ट लगने लगा था। बोर्ड में कम से कम 7 व अधिकतम 14 सदस्य होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में दो ही सदस्य हैं। अल्पसंख्यक मामलों में खासी रुचि दिखाने और असल में कारगुजारी का यह जीता जागता नमूना है।

10 हजार करोड़ रुपए की जमीन पर अतिक्रमण

महाराष्ट्र में 90 एकड़ जमीन में से लगभग 5 हजार जमीन पर अतिक्रमण है। सरकार को आर्थिक सहयोग में इजाफा करना चाहिए। संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष विलासराव देशमुख सरकार ने 15 करोड़ रुपए का आश्वासन दिया था। इसके अलावा बोर्ड को मजबूत करने सरकार द्वारा बोर्ड को अधिकारियों की नियुक्ति की मंजूरी दी जानी चाहिए। नियमित सीईओ के अलावा इसके अधीन कम से कम चार क्लास वन अधिकारी होने चाहिए। क्षेत्रीय अधिकारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए इसके अलावा अधिकारियों को अधिकार मिलने चाहिए।
- रऊफ शेख, पूर्व सीईओ वक्फ बोर्ड

वक्फ की जमीन पर काबिज हैं बड़े नाम

मुंबई में खास स्थान पर साढ़े चार हजार स्क्वेयर मीटर जमीन रिलायंस के मुकेश अंबानी ने ली थी। वक्फ की इस जमीन से संबंधित मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। औरंगाबाद में तो कई नेताओं की शैक्षणिक संस्थाएं वक्फ की जमीन पर चल रही हैं। हालत ये है कि अल्पसंख्यक समुदाय के होनहार बच्चों तक को इन संस्थाओं में दाखिला नहीं मिल पाता।

राज्य में 200 करोड़ की आवक दे सकती है वक्फ की जमीन

जानकारों की राय में देश के भीतर वक्फ की 2 लाख करोड़ रुपए (10 वर्ष पूर्व सच्चर कमेटी के आकलन के अनुसार) की जमीन से 20 हजार करोड़ की सालाना आवक हो सकती है। वहीं महाराष्ट्र में सभी प्रकार की वक्फ की जमीनों का कायदे से उपयोग हो तो राज्य में वक्फ से वार्षिक आवक 200 करोड़ रुपए तक की हो सकती है। इससे अल्पसंख्यक विकास के कई कार्य कराए जा सकते हैं। महाराष्ट्र में मराठवाड़ा के भीतर वक्फ की सबसे ज्यादा यानी करीब 60 हजार एकड़ जमीन है। मुगलों के बाद निजाम स्टेट होने की वजह से यहां वक्फ की जमीन अधिक है।

आवाम के लिए दो प्रकार के हैं वक्फ

शरियते इस्लामिया में यूं तो कई प्रकार के वक्फ हैं, किंतु आवाम के इस्तेमाल के लिए दो तरह के वक्फ हैं, जिनमें वक्फे इल्ललाह तथा वक्फे अलन्नास हैं।
वक्फे इल्ललाह: इसके तहत मस्जिद, मदरसे व कब्रिस्तान के लिए जमीन वक्फ अर्थात दान की जाती है। किसी राजा, बादशाह या कोई व्यक्ति वक्फे इल्ललाह करता है तो इसे किसी अन्य व्यक्ति को बेचने का अधिकार नहीं है। यह जमीन जायदाद केवल उसी मकसद के लिए उपयोग की जा सकती है, जिसके लिए यह दी गई है।

वक्फे अलन्नास: आम नागरिकों की सुविधा के लिए वक्फ की जाने वाली ऐसी जमीन जायदाद में कुएं, सराय, बाग-बगीचे आदि बनाए जाते हैं। भारत में ये दोनों प्रकार के वक्फ बिखरे पड़े हैं। इसका जिम्मेदार व्यक्तियों द्वारा ही दुरुपयोग किया जा रहा था इसीलिए समाज की ओर से आवाज उठाई गई कि एक मजबूत कानून बनाया जाए, जिससे वक्फ की सुरक्षा हो सके। जिसके बाद वक्फ एक्ट अमल में आया। कई राज्यों के साथ महाराष्ट्र में भी वक्फ बोर्ड का गठन हुआ। वक्फ की जमीन जायदाद की निगरानी इनके जिम्मे दे दी गई, लेकिन दुर्भाग्य की बात ये है कि बोर्ड की कई ऐसी कार्यप्रणाली सामने आई है, जो ईमानदारी व दयानतदारी पर निर्भर नहीं है।
- डॉ. शफरुद्दीन साहिल
वरिष्ठ इतिहासकार

कमियां दूर करने की कोशिश जारी

बोर्ड के कामकाज का कोरम से खास ताल्लुक नहीं है। बोर्ड का काम चल रहा है। 108 कर्मचारियों की भर्ती के आदेश दे दिए गए हैं। सरकार ने इसके लिए आर्थिक सहयोग भी दिया है। थोड़ी बहुत कमियों को दूर करने की कोशिश जारी है।
- आरिफ नसीम खान,


नागपुर सहित विदर्भ में करीब 100 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण, संयुक्तसंसदीय समिति की सिफारिश ताक पर

करीब 4 वर्ष पूर्व वक्फ संपत्ति के मामले में संयुक्त संसदीय समिति राज्य सरकार की भूमिका पर प्रश्नचिह्न् लगाया था। सरकार के रवैए को लापरवाह बताते हुए समिति ने कई विपरीत टिप्पणियां की। संसद में पेश नौवीं रिपोर्ट में कमेटी राज्य वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एम. ए. अजीज पर अधिकारों के दुरुपयोग के लिए कार्रवाई की सिफारिश भी की।

राज्य में वक्फ के कामकाज समिति ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि प्रगतिशील राज्य होने के बावजूद महाराष्ट्र सरकार अपने उत्तरदायित्व का सही तरह से निर्वहन नहीं कर रही है। यह बेहद खेदजनक है कि सरकार की लापरवाही की वजह से वक्फ की कीमती संपत्ति पर कब्जा व अवैध निर्माण हुआ। आशा है कि सरकार इसकी गंभीरता को समझेगी और अपने दायित्व का निर्वहन करेगी। इस संबंध में समिति ने तीन वर्ष पूर्व महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों का दौरा किया था और जनसुनवाई भी की थी।

यह जाहिर कर रहा है अल्पसंख्यक कल्याण विभाग बनाकर सरकार अल्पसंख्यक विकास का केवल दावा कर रही है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ने कई संपत्तियों को बेचने या पट्टे पर देने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दिए, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है यह अधिकार सिर्फ मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष का है इसीलिए तत्कालीन अध्यक्ष के व्यवहार जांच कराई गई। पड़ताल में पाया गया कि कई वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण ही नहीं हुआ।

कई जगहों पर यह जायदाद अभी भी मुतवल्लियों के नाम पर हैं, ताकि आसानी से बेची जा सके। इसीलिए आठवीं संसदीय समिति ने भी वक्फ संपत्तियों का दोबारा सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए थे, पर साल दर साल गुजरते रहे, लेकिन यह नहीं हो पाया। हैरानी जताते हुए कमेटी ने फिर यही हिदायत दी कि सर्वेक्षण आयुक्त को स्वयं जाकर तमाम संपत्तियों का दौरा करें। उसके बाद संपत्तियों की सूची बकायदा राजपत्र में जारी की जाए एवं राजस्व विभाग उन संपत्तियों को वक्फ के नाम पर कर दे।

जांच कमेटी का कामकाज ठप

जांच करने वाली समिति को सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया इसीलिए समिति कर्मचारियों ने कामकाज बंद कर दिया। विधानसभा के दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामे के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने इस एक सदस्यीय जांच कमेटी का ऐलान किया था।

10 अक्टूबर 2007 को जांच का उत्तरदाचित्व सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए के टी शेख को दिया गया। काम करने के लिए उन्हें दस माह बाद कर्मचारी दिए गए। उन्हें तनख्वाह भी नहीं दी गई। सूत्रों के अनुसार न्यायाधीश ने खुद 70 हजार अपने खर्च किए। उन्होंने कहा था कि यदि मुझे तमाम संसाधन मुहैया कराए जाते तो एक सालभर में ही रिपोर्ट सौंप देता।

हजहाउस में हो कार्यालय : अहमद

गंजीपेठ स्थित हजहाउस में वक्फ बोर्ड कार्यालय खोले जाने की मांग रखते हुए पूर्व मंत्री हाजी अनीस अहमद ने कहा कि इमारत में अल्पसंख्यकों से संबंद्ध गतिविधियां व कामकाज जारी रहना चाहिए। इसीलिए यहां वक्फ बोर्ड कार्यालय, मौलाना आजाद महामंडल का कार्यालय तथा अल्पसंख्यक विभाग का कार्यालय स्थापित किया जाना चाहिए।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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