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सरकार का मूड सख्त: सीबीएसई-आईसीएसई स्कूलों पर दिखेगा असर

Bhaskar News | Dec 19, 2012, 03:02AM IST
सरकार का मूड सख्त: सीबीएसई-आईसीएसई स्कूलों पर दिखेगा असर

नागपुर. सरकार ने सीबीएसई और आईसीएसई से जुड़े स्कूलों पर सरकार सख्त रवैया अपनाने का मूड बना लिया है। अब केंद्रीय शिक्षा बोर्ड से जुड़े स्कूलों को प्रदेश में शुरू करने से पहले राज्य सरकार की अनुमति अनिवार्य होगी। 


 


इन्हें अनापत्ति-प्रमाण-पत्र (एनओसी) के अलावा अन्य मान्यताएं भी लेना अनिवार्य होगा। साथ ही पहली से आठवीं कक्षा तक मराठी विषय भी सख्ती से लागू करना होगा और इसे दूसरी भाषा का दर्जा देना होगा। उक्त घोषणा शालेय शिक्षामंत्री राजेंद्र दर्डा ने विधानपरिषद में की।



गौरतलब है कि अब तक केंद्रीय शिक्षा बोर्ड के स्कूलों पर राज्य सरकार का किसी तरह का नियंत्रण या हस्तक्षेप नहीं था। नतीजतन, शिकायतों के बावजूद राज्य सरकार इनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई या सख्ती नहीं कर पाती थी। अब इन्हें नियमों के दायरों में लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।



अब सीबीएसई, आईसीएसई सहित अन्य केंद्रीय शिक्षा बोर्ड से जुड़े स्कूलों को प्रदेश में शुरू करने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।



स्कूलों का निरीक्षण करने वाले राज्य सरकार अधिकारी-कर्मचारियों को सहयोग करना उनके लिए जरूरी होगा। सीबीएसई स्कूलों में विद्यार्थियों के मराठी भाषा से दूर होने पर दर्डा चिंता जताई।


ऐसे कसी लगाम, नर्सरी पर भी नियंत्रण


 


अभी तक तक राज्य सरकार का पूर्व प्राथमिक स्कूलों (नर्सरी) पर नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन पर भी सरकार की नजर होगी।


 


सीधी भर्ती नहीं 



स्कूलों में शिक्षकों की सीधी भर्ती नहीं होगी। शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। टीईटी में उत्तीर्ण होने के बाद ही  शिक्षक के रूप में उनकी नियुक्ति की जाएगी। 65 हजार 324 स्कूल मराठी माध्यम के हैं।


 


इसमें से 90 प्रतिशत का संचालन स्थानीय निकाय संस्था करती हंै। इसी तरह 19 हजार 766 माध्यमिक शालाएं हैं। 90 प्रतिशत का संचालन निजी हाथों में है। लेकिन  शैक्षणिक दर्जे को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। इसलिए अब शिक्षकों का दर्जा देखा जाएगा। 


 


मराठी स्कूलों में सेमी-अंग्रेजी पाठ्यक्रम



मराठी स्कूलों को प्रतिस्पर्धा में टिकाए रखने के लिए राज्य सरकार मराठी स्कूलों में भी सेमी-अंग्रेजी पाठ्यक्रम लागू करने जा रही है। इसमें गणित और विज्ञान पाठ्यक्रम अंग्रेजी में होगा।


 


अन्य विषय मराठी में रखे जाएंगे।हर जिले में खुलेंगे सरकारी मेडिकल कॉलेज राज्य सरकार हर जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना बना रही है।


 


चंद्रपुर, गोंदिया व बारामती में महाविद्यालय का काम शुरू करने की घोषणा अधिवेशन के इसी सत्र में कर दी जाएगी। स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री डॉ. विजय कुमार गावित ने विधानसभा में जानकारी दी।


 


प्रश्नकाल में विधायक गोपाल अग्रवाल, रामरतन राउत व अन्य ने मेडिकल कॉलेज का मामला उठाया। विधायक अग्रवाल ने कहा कि 2009 में गोंदिया में मेडिकल महाविद्यालय खोलने की घोषणा विधानसभा में की गई थी। लेकिन महाविद्यालय स्थापना के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।


 


डॉ. गावित ने बताया कि गोंदिया व चंद्रपुर में मेडिकल कॉलेज के संबंध में वित्त, नियोजन व राजस्व विभाग की आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। विधायक बच्चू कडू ने अमरावती में महाविद्यालय खोलने का निवेदन किया।


 


विधायक नाना पटोले ने भी विदर्भ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर ध्यान देने के लिए कहा। बारामती में महाविद्यालय को प्राथमिकता देने के प्रश्न पर स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों से जनप्रतिनिधियों की अधिक मांग आयी, उन क्षेत्रों को वरीयता दी गई है। जिला स्तर पर मेडिकल महाविद्यायल खोलने की दिशा में सरकार काम कर रही है।

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