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सचिन पर उंगली उठाने वालों को लिटिल मास्टर ने दिया दो टूक जवाब!

विनोद यादव | May 02, 2012, 00:30AM IST
 
 


पुणे.सचिन तेंडुलकर ने कहा कि वे खिलाड़ी हैं और हमेशा खिलाड़ी ही रहेंगे। राज्यसभा के लिए मनोनीत होने के बाद मंगलवार को उन्हें पुणे में सम्मानित किया गया।


 

सचिन ने कहा कि यह एक बड़ा सम्मान है। इससे जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। लेकिन यदि कोई कहता है कि यह मेरे क्रिकेट करियर को खत्म कर देगा, तो गलत है। मेरा सांसद के रूप में चयन इसलिए हुआ क्योंकि मैं 22 साल से क्रिकेट खेल रहा हूं। पढ़िये और क्या कहा..


 

अपने खेल पर


 


क्रिकेट मेरी जिंदगी है। और मैं इसे जी रहा हूं। अभी संन्यास का इरादा नहीं है।
विश्वकप 2003 में पाकिस्तान के खिलाफ 98 रन सबसे यादगार पारी है।
किसी महत्वपूर्ण मैच के लिए बहुत पहले से ही तैयारी करता हूं।
जॉन राइट ने 2003 में ही कहा था कि मैं क्रिकेट में महाशतक लगा सकता हूं।


 


सामाजिक जीवन पर


 


 


400 गरीब बच्चों के पढ़ाई का खर्च उठाता हूं। सामाजिक कार्य का प्रचार करना अच्छा नहीं लगता है।
हर व्यक्ति को अपनी हैसियत के अनुसार समाजसेवा करना चाहिए।
देने का सुख असीम होता है। इस धर्म को सभी लोगों को निभाना चाहिए।


 


अपने परिवार पर


 


 


माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं होता है। वे आपके सबसे बड़े शुभचिंतक होते हैं।
अंजलि के रूप में जीवन साथी मिलना मेरा सौभाग्य है।
माता-पिता ने मेरे लिए काफी त्याग किया है,वह और कोई नहीं कर सकता है।


 


विश्वकप जीत पर


 


 


2011 वर्ल्डकप जीतने के बाद वानखेड़े स्टेडियम के बाहर खड़ी मेरी कार पर चढ़कर प्रशंसक जश्न मना रहे थे। ड्राइवर ने मुझे बताया, तो मैंने उससे कहा कि कार में खरोच लगने की परवाह मत करो।


 

वर्ल्डकप की जीत ने पूरे देश को एकसूत्र में बांध दिया है। यह मेरे जीवन का महानतम दिन है।
ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वे  सही निर्णय लेने के लिए हमेशा मेरा मार्गदर्शन करते रहें।


 


 

बेबाकी


 


 


१ राष्ट्रपति यदि आपका मनोनयन करें तो इससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता है। आप कैसे उस सम्मान से मना कर सकते हैं।
२  एयरफोर्स ने मुझे ग्रुप कैप्टन बनाया था तो क्या मैं हवाई जहाज उड़ाना सीख गया। नहीं ना! तो राजनीतिज्ञ नहीं बनूंगा,भरोसा कीजिए।
३ जो हो गया उसे तुम वापस नहीं ला सकते। अपने सपनों का पीछा करो,जब तक कि वह साकार न हो जाए।


 

सचिन जिन 400 बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की बात कह रहे हैं, वे मुंबई के अपनालय के गरीब बच्चे हैं। सचिन हर महीने यहां आते हैं।
 
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