नागपुर. आधुनिक जीवन शैली और खानपान में परिवर्तन के कारण लोगों पर मोटापा हावी होता जा रहा है, साथ ही मेडिकल सुविधा के कारण औसत आयु भी बढ़ी है। ऐसे में लोगों के अंदर घुटनों से संबंधित समस्याएं बढ़ती जा रही है।
आज के दौर में घुटनों के इलाज में लाखों रुपये के खर्च आ रहे हैं, लेकिन जल्द ही एक घुटने की कीमत घट कर 22 हजार रुपये तक आ सकती है।
अगले पांच वर्षों में घुटने बनानेवाली विदेशी कंपनियां भारतीय बाजार में आ जाएंगी, जिससे प्रतियोगिता बढ़ेगी और लागत में कमी आएगी। यह जानकारी मुबंई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के प्रोफेसर और हेड ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एम. एल. सराफ ने दी। वे रविवार को दैनिक भास्कर कार्यालय में संपादकीय सहयोगियों के साथ अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे।
उम्रदराजों में कैल्शियम की कमी
डॉ. सराफ ने बताया कि वर्तमान समय में मेडिकल सुविधा मिलने और जागरूकता से लोगों की औसत आयु बढ़ी है। लेकिन देखा जा रहा है कि लोगों में घुटनों की समस्याएं बढ़ रही हैं। शोध से पता चला है कि 50 प्रतिशत उम्रदराज लोगों में कैल्शियम की कमी रहती है। 60 साल की उम्र के बाद शरीर में कैल्शियम कम होने लगता है।
इसकी मात्रा को बनाए रखने के लिए कैल्शियम की दवाइयों के साथ ही विटामिन डी की दवा का सेवन जरूरी है। भारत में केवल धूप से विटामिन डी प्राप्त नहीं हो पाती है। हरी सब्जियों, सेब, दूध, अंडे, संतरे आदि खाद्य पदार्थों से इसकी आवश्यकता पूरी हो सकती है। 2 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों में सर्वाधिक कैल्शियम की जरूरत होती है।
तनाव पैदा करने वाले व्यायाम से बचें :
डॉ. सराफ बताया कि ज्यादा चलने, दौडऩे, सीढिय़ां चढऩे-उतरने से घुटनों की समस्या बढ़ती है। सामान्य लोगों के लिए दिन में दो बार 35 मिनट चलना, 14 मिनट दौडऩा काफी है।
मधुमेह के मरीजों को करीब 45 मिनट चलना चाहिए, ताकि शक्कर की मात्रा को नियंत्रित किया जा सके। इससे रक्त छन कर मांसपेशियों से घुटनों में पहुंचता है। 40 वर्ष की उम्र के बाद घुटनों पर तनाव डालने वाले व्यायाम करने से बचना चाहिए। व्यायाम व किसी भी प्रकार के कार्य को नियंत्रित रखना जरूरी है।
घुटनों पर दबाव कम डालें :
क्रिकेट, फुटबॉल, एथलेटिक, हॉकी जैसे दौडऩे-भागनेवाले खिलाडिय़ों को नियमित अभ्यास के दौरान किसी प्रकार की समस्या नहीं आती है। अभ्यास छूट जाने के बाद उन्हें घुटनों से जुड़ी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
इसी प्रकार योग व अन्य प्रकार के शारीरिक व्यायाम को अधिक करने व अचानक कम करने या छोड़ देने से भी समस्याएं आती हैं। घुटनों से जुड़ी समस्याओं को रोकने के लिए जरूरी है कि उस पर कम भार पड़े।
मोटापा व छोटी काया परेशानी :
मोटापा व छोटी काया वाले व्यक्ति को घुटनों की समस्या होना आम बात है। चलते समय पैरों पर शरीर का दोगना भार पड़ता है, वहीं सीढ़ी चढ़ते-उतरते समय यह भार चौगुना हो जाता है।
घुटनों की गतिविधियों के लिए सहायक द्रव्य में कमी या उसमें गतिशीतला में कमी आने की वजह से घुटनों में दर्द होता है। बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या भी बढ़ती जाती है। घुटनों पर बार-बार तनाव पडऩे और मांसपेशियों में समस्या आने से परेशानी बढ़ती है।
सिरेमिक की परत बनाने की तैयारी :
वर्तमान में नए घुटनों को इस तरह बनाया जा रहा है, जिससे उसमें 120 डिग्री की हलचल हो सके। इसमें घुटनों के दोनों ओर धातु की कटोरी होती है। इसके बीच में प्लास्टिक की परत होती है। इससे 20 से 25 वर्ष तक व्यक्ति बिना दर्द रह सकता है। शल्यक्रिया के दौरान वायरलेस नेविगेशन से सही परिणाम प्राप्त हो रहे हैं।
भविष्य में प्लास्टिक की जगह सिरेमिक का उपयोग करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि वह अगले 50 वर्षो के लिए उपयोगी बना रहे। कुछ वर्षों में एक घुटना बदलने में जो लागत करीब डेढ़ लाख रुपये आती है, वह घट कर 20 से 22 हजार तक आ सकती है।