मराठा समाज आरक्षण मुद्दे पर उच्चाधिकार मंत्री समिति बनाने का फैसला

नागपुर. मराठा समाज के आरक्षण का मसला सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने उच्चाधिकार मंत्री समिति बनाने का फैसला किया है।
उद्योग मंत्री नारायण राणे की अगुवाई में यह समिति आरक्षण के पेंच को सुलझाने का प्रयास करेगी। गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय किया गया।
राज्य का मराठा समाज 25 फीसदी आरक्षण देने की मांग कर रहा है। समाज चाहता है कि उसे भी आरक्षण कोटे में शामिल किया जाए।
कई साल पुरानी इस मांग की गंभीरता को सरकार अच्छी तरह समझती है, पर पेंच को सुलझाना उसके लिए मुश्किल हो रहा है।
इस संबंध में गुरुवार को विधानभवन में विधानपरिषद सभापति शिवाजीराव देशमुख की अध्यक्षता में विधानसभा अध्यक्ष दिलीप वलसे पाटील, मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, उद्योग मंत्री नारायण राणे, वन मंत्री पतंगराव कदम तथा कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई थी।
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन पाटील, ग्राम विकास मंत्री जयंत पाटील, कृषि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, सामाजिक न्याय मंत्री शिवाजीराव मोघे, विधानपरिषद उपसभापति वसंत डावखरे, विधानपरिषद में विपक्ष के नेता विनोद तावड़े सहित कई आला अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी।
तीन महीने में सरकार को रिपोर्ट देगी समिति:
समिति सभी वर्गों से चर्चा करने के बाद तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। एक वरिष्ठ मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राज्य में आरक्षण का कोटा 52 फीसदी तक पहुंच गया है।
इसमें से 27 फीसदी पिछड़़ा वर्ग (ओबीसी) को और शेष 25 फीसदी में से अनुसूचित जाति, जनजाति, वीजेएनटी और आर्थिक रूप से पिछड़ों को आरक्षण दिया जाता है। मराठा समाज 25 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहा है।
जबकि सरकार का विचार ओबीसी के 27 फीसदी में से 25 फीसदी आरक्षण देने का है, लेकिन मराठा समाज इसके लिए तैयार नहीं है।
वे अलग से 25 फीसदी आरक्षण की मांग पर अड़ा है। ओबीसी का दावा है कि उन्हें 27 फीसदी नहीं, बल्कि 19 फीसदी आरक्षण मिलता है।









