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कभी सहीं थीं झुग्गियों में यातनाएं पर आज हैं 300 करोड़ के कंपनी की मालकिन

Dainik Bhaskar News Network | Jun 10, 2012, 01:24AM IST
 
 



 

मुंबई. कल्पना सरोज! रियल स्लमडॉग मिलियनेयर! अकोला, महाराष्ट्र के रोपड़खेड़ा गांव के एक सिपाही की बेटी कल्पना की स्कूली पढ़ाई छुड़वाकर, 12 साल की उम्र में 10 साल बड़े लड़के से शादी कर दी गई।


 

पति के साथ मुंबई की झुग्गी बस्ती में रहीं, जहां असहनीय यातनाएं झेलीं और अंतत: त्रस्त होकर वापस गांव चली गईं। पुलिस में भर्ती होने की कोशिश की, लेकिन असफल हुईं। नर्सिग का काम सीखने का प्रयास किया, यहां भी असफल। फिर सिलाई सीखी। अंतत: 16 साल की उम्र में फिर मुंबई पहुंच गईं।


 

मुंबई के घाटकोपर में एक उदार गुजराती परिवार का सहारा मिला। वहां 2 रुपए रोजाना मेहनताने में एक हौजरी यूनिट से जुड़ी, बस फिर उन्होंने मुड़कर पीछे नहीं देखा।


 

अब उन्हें जिंदगी में पैसे के महत्व का अभास हुआ और 22 साल की उम्र में स्टील फर्नीचर का कारोबार करने वाले एक व्यक्ति से शादी कर ली। 1989 में पति की मृत्यु हो गई। कल्पना ने खुद कारोबार आगे बढ़ाया। आज मुंबई की दो सड़कें कंपनी के नाम से जानी जाती हैं।


 

1995 में, दो बच्चों की मां कल्पना ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी शुरू की। मुंबई में ही एक बड़ा-सा भूखंड खरीदा। 4 करोड़ की लागत से एक कॉम्पलेक्स का निर्माण किया और उसे भारी मुनाफे के साथ बेचा। फिर स्टील और शुगर के कारखाने शुरू किए।


 

2006 में उनकी कंपनी ‘कल्पना सरोज एंड एसोसिएट्स’ ने प्रसिद्ध व्यापारी रामजी कमानी वाले की 560 कामगार, 160 करोड़ का कर्ज और 170 कानूनी फसादों तले दबी, बीमार, बंद पड़ी कंपनी ‘कमानी ट्यूब्स’ को पुनर्जीवित करने का जिम्मा लिया।


 

पहले कदम में कर्मचारियों को 17 साल का एरियर मिलाकर, 8.5 करोड़ रुपए तनख्वाह बांटी। बकौल कल्पना कर्मचारियों को भरोसे में लेने के लिए यह जरूरी था। 3 अरब की लागत से कारखाने को मुंबई के वाडा क्षेत्र में शिफ्ट किया।


 

देश में पहली बार उनकी कंपनी ने जर्मनी से 1 अरब रुपए की दो विशाल मशीनें आयात कीं। आज कंपनी की कुल संपदा 300 करोड़ से अधिक है। अपने पायलट पुत्र की रुचि पारिवारिक बिजनेस में न होने के कारण वे उसके लिए एक प्राइवेट एयरलाइंस शुरू करने और अपने कारोबार को कुवैत एवं दुबई जैसे देशों में फैलाने की योजना बना रही हैं।


 

हाल ही में बतौर महिला उद्यमी राजीव गांधी पुरस्कार पाने वाली कल्पना बिजनेस से अलहदा समाज सेवा में भी आगे हैं। वे साल भर करीब 2000 बच्चों को लाइब्रेरी और होस्टल सुविधाएं मुहैया कराने के अलावा आर्थिक रूप से भी उनकी मदद करती हैं।

-भूपेन्द्र शर्मा


 


 


 
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