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एक रोगी के बहाने खुला मानसिक अस्पताल के गोरखधंधे का सच

कपिल नायक | Apr 14, 2012, 00:09AM IST
 
 


नागपुर. प्रादेशिक मानसिक रुग्णालय नागपुर फिर कठघरे में है। इस बार एक मानसिक रोगी ने ही उसे इस हालत में पहुंचाया है। गुरुवार की सुबह यहां इलाजरत एक मानसिक रोगी दीवार फांद कर फरार हो गया। गौतम को न्यायालय के आदेश पर मनोरूग्णालय इलाज के लिए भेजा गया था।

 

गौतम के परिजनों ने बताया कि वह घरवालों के अलावा पड़ोसियों के साथ भी हिंसक झगड़ा करता था। इन्हीं हरकतों से परेशान होकर उसे इलाज के लिए मनोरूग्णालय में भर्ती कराया गया था। गौतम के पिता देवीदास रूआंसे गले से बताते हैं कि अगर मालूम होता कि इलाज के नाम पर मेरे बेटे के साथ ज्यादती होगी तो मैं उसे घर पर ही रखता।

 

वार्ड नम्बर 15 में था भर्ती : 30 वर्षीय गौतम देवीधर सोनारे, निवासी सुरेन्द्रगढ़ को करीब एक महीने पहले मानसिक बीमारी से ग्रस्त होने के कारण प्रादेशिक मानसिक रुग्णालय में भर्ती कराया गया था। गौतम वार्ड नम्बर 15 में भर्ती था। गुरुवार की सुबह सात बजे गौतम अस्पताल परिसर की दीवार फांदकर फरार हो गया।

 

मरीज के फरार होने की खबर पर अस्पताल के कर्मचारियों के होश फाख्ता हो गये। सभी ने अपने स्तर पर गौतम की तलाश शुरू कर दी। इस बीच, दो कर्मचारी गौतम के घर पहुंचे तो वह घर पर मिला। कर्मचारियों ने जबरदस्ती कर उसे पकड़ना चाहा, लेकिन गौतम धक्का-मुक्की कर घर से भाग गया।

 

सार्वजनिक बांधकाम पर लापरवाही का आरोप

 

मनोरूग्णालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मरीज के फरार होने का यह पहला मामला नहीं है। पिछले साल भी करीब 8 मरीज यहां से भाग चुके हैं। वार्ड न. 15 व 16 के पास स्थित चाहरदीवारी केवल पांच फीट की है।

 

इसे फांदने में मरीजों को आसानी रहती है। सार्वजनिक बांधकाम विभाग को दीवार की ऊंचाई बढ़ाने के लिए लिखा गया, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। सार्वजनिक बांधकाम के एसई ने पिछले दिनों मनोरूग्णालय का निरीक्षण भी किया था, लेकिन कार्यवाही कुछ नहीं की।

 

मार के डर से फरार

 

गिट्टीखदान पुलिस ने मनोरूग्णालय से भागे गौतम सोनारे का मामला गुमशुदगी में दर्ज कर लिया, लेकिन उसे तलाशने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। समाजसेवी नरेश भोंसले के पास मिले गौतम से जब मनोरूग्णालय से भागने की बात पूछी तो रोते हुए उसने बताया कि वहां पर सुबह उठाने से लेकर रात को सोने तक मारपीट की जाती है। खाने के लिए बहुत बुरा खाना दिया जाता है।

 

किसी से कोई बात कहने पर डंडे से पिटाई के रूप में जबाव मिलता है। समाजसेवी नरेश ने बताया कि गौतम के घर से फरार होने के बाद वह उन्हें बॉटनिकल गार्डन के पास टहलता मिला।

 

गौतम को इलाज के लिए मनोरूग्णालय में भर्ती कराने में नरेश की अहम भूमिका रही। नरेश ने गौतम के मिलने की जानकारी मनोरूग्णालय व पुलिस थाने दोनों जगह दी, लेकिन उन्होंने कोई सुध नहीं ली।

 

नरेश का कहना है कि मनोरूग्णालय में मरीजों के साथ होने वाले बर्ताव की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। अस्पताल में बाहरी शहरों के मरीज भी इलाज के लिए भर्ती हैं, अगर वो भी भागते हैं तो वो तो घर तक भी नहीं पहुंच पाते हैं। गौतम तो स्थानीय था, इसलिए घर तक पहुंच गया। दूसरे भागे हुए मरीजों का तो भगवान ही मालिक रहता है।

 

तलाश जारी है...

 

मरीज के भागने की खबर गिटटीखदान पुलिस को दी गई है। मरीज की तलाश जारी है।

-डॉ. सुहास पी बाघे, उप अधीक्षक प्रादेशिक मनोरूग्णालय

 

और इन्हें जानकारी नहीं

 

गिट्टीखदान थाने के पीआई सी एम बहादुरे से जब फरार मरीज गौतम के मामले की जानकारी मांगी गई तो उन्होंने बताया कि मैं शाम को ही आया हूं, बाहर गया था। मुझे जानकारी नहीं है।

 

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