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बांबे हाईकोर्ट का निर्देश : मेलघाट में रिक्त 800 पद भरें

Bhaskar News | Dec 07, 2012, 04:12AM IST
बांबे हाईकोर्ट का निर्देश : मेलघाट में रिक्त 800 पद भरें

मुंबई. बांबे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मेलघाट में  800 सरकारी रिक्त पदों को शीघ्रता से भरने व राज्य के 15 आदिवासी जिलों में सक्रिय बालविकास केंद्रों का ब्यौरा देने का निर्देश दिया है।


 


गुरुवार को न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ व न्यायमूर्ति ए.ए. सैयद की खंडपीठ ने सरकार को आदिवासी क्षेत्र में कुपोषण के शिकार बच्चों व सरकारी योजनाओं के अमल से भी अवगत कराने को कहा है।


 


पेश करें हलफनामा



खंडपीठ ने पूछा कि सरकार ऐसे क्षेत्र में कुपोषण से निपटने के लिए कैसी कार्ययोजना बना रही है? इन इलाकों में कितने बच्चों की मौत कुपोणण से हुई? इसका सारा ब्यौरा 27 जनवरी 2013 तक हलफनामे के रूप में पेश करने को कहा गया है।



जारी करें निधि



सामाजिक कार्यकर्ता पूर्णिमा उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने सरकार को मेलघाट में हेतरू गांव में टूटे पुल की मरम्मत के लिए शीघ्रता से निधि जारी करने का निर्देश दिया।


 


बेलाडोह से 20 गांवों को जोडऩे वाला यह पुल 23 जुलाई 2012 को भारी बरसात के चलते टूट गया था जिसके चलते वहां सार्वजनिक वाहनों का आना जाना बंद हो गया है। इस तथ्य को जानने के बाद खंडपीठ ने आदिवासी, राहत व पुनर्वास व सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग के सचिव को इस मामले का संज्ञान लेने को कहा है।



इस दौरान खंडपीठ ने धारणी व चिखलदरा में रिक्त ग्रामसेवकों के 10 पदों को भी भरने को भी कहा।  इससे पहले पूर्णिमा उपाध्याय ने कहा कि मेलघाट में 800 सरकारी पद रिक्त हैं। इसमें सर्वाधिक तृतीय (480) व चतुर्थ (150) श्रेणी के पद हैं। ग्रामसेवकों के भी काफी पद खाली हैं।


 


200 गांवों के लिए सिर्फ 28 ग्रामसेवक हैं। वजन के लिहाज से 13 हजार बच्चे कुपोषित हैं। स्वास्थ्य व बालविकास केंद्रों को लेकर भी सरकार की ओर से कोई उत्साह नहीं दिखाई देता है। अमरावती जिला परिषद की वेबसाइट पर कोई भी सही जानकारी उपलब्ध नहीं है।


 


नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार में कोई उत्साह नहीं है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मेलघाट के हालात सुधर रहे हंै लेकिन अन्य आदिवासी इलाकों की स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं है। इस पर कोर्ट में मौजूद प्रोजेक्ट अधिकारी पी प्रदीप ने कहा कि मेलघाट के लिए एसडीएम की नियुक्ति की है।


 


जो अधिकारी मौजूद हैं वे मुस्तैदी से अपना काम कर रहे हैं। जहां तक प्रश्न वेबसाइट का है तो उसमें सुधार का काम चल रहा है। बालविकास केंद्र प्रभावी ढंग से काम कर रहे है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 27 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी।

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