LIVE PHOTOS : राज ठाकरे के 10 हजार लोग के लिए 15 हजार पुलिसवाले

मुंबई. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के मुखिया राज ठाकरे को पुलिस की अनुमति के बिना मोर्चा निकालना महंगा पड़ रहा है। इस मामले में एमएनएस और अन्य के खिलाफ डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई है। ठाकरे ने मोर्चा निकालने के बाद भाषण देते हुए राज्य के गृह मंत्री आर आर पाटिल और मुंबई के पुलिस कमिश्नर अरुप पटनायक का इस्तीफा मांगा था। पाटिल ने कहा कि राज ठाकरे ने मोर्चा निकालने के लिए अनुमति नहीं ली थी, ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
ठाकरे ने 11 अगस्त को मुंबई में हुई हिंसा के विरोध और पाटील के इस्तीफे की मांग के समर्थन में गिरगांव चौपाटी से आजाद मैदान तक मोर्चा निकाला। ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र विदेशियों और मुंबई बांग्लादेशियों का अड्डा बन गया है। ठाकरे ने आरोप लगाया कि मुंबई के पुलिस कमिश्नर अरुप पटनायक ने आजाद मैदान में हिंसा करने वाले अपराधियों को छुड़वाया। महिला पुलिसकर्मियों पर अत्याचार हुआ, उन्हें पीटा गया। मोर्चा निकालने वाले हथियारों के साथ आए थे और पुलिस कमिश्नर को सब पहले से पता था। गृह मंत्री पाटिल पुलिसवालों को मार खाने पर मजबूर करते हैं। उन्होंने कहा, 'बाबरी मस्जिद यूपी में गिरती है और मुंबई में दंगे होते हैं। लेकिन यूपी में जब बुद्ध की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है तो महाराष्ट्र के दलित नेता कुछ क्यों नहीं बोलते। मुझे यहां आने से रोका जा रहा था। बाकी नेता भड़काऊ भाषण देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती। यदि आर आर पाटिल को थोड़ी भी शर्म होगी तो वो इस्तीफा दे देंगे।'
ठाकरे को मंच पर फूल भेंट करने वाले पुलिसकर्मी प्रमोद तावड़े ने कहा कि उसके इस कदम से उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। उनसे अपनी हत्या की आशंका भी जताई लेकिन साथ ही कहा कि उसे इसका डर नहीं है। सिपाही ने कहा, 'मेरा डर खत्म हो गया है, मैं एक जिंदा लाश हूं।' पुलिसकर्मी ने आरोप लगाया कि आजाद मैदान हिेंसा के मामले में दोषियों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई हुई है।
(फोटो: गिरगांव चौपाटी से आजाद मैदान जाते राज ठाकरे सुरक्षाकर्मियों से घिरे हुए)







