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अमेरिका भेजते तो शायद बच जाती दुष्कर्म पीड़ित युवती

ललित मोहन बंसल | Dec 30, 2012, 04:33AM IST
अमेरिका भेजते तो शायद बच जाती दुष्कर्म पीड़ित युवती

दिल्ली में दुष्कर्म की शिकार और चोटग्रस्त आंत से पीडि़त युवती की जान और देश की प्रतिष्ठा को बचाया जा सकता था, बशर्ते उपचार के लिए उसे अमेरिका लाया जाता।


इस युवती को सिंगापुर क्यों भेजा गया। यह सवाल अमेरिका में, खासकर प्रवासी भारतीय डाक्टरों के लिए पहेली बना हुआ है।


इन डाक्टरों का एक सीधा-सादा सवाल यह है कि जब देश के गणमान्य राजनीतिज्ञ, फिल्म अभिनेता अथवा क्रिकेटर एक सामान्य उपचार के लिए अमेरिका आ सकते हैं, तो फिर मीडिया में पिछले तेरह दिन से देश की बेटी के रूप में प्रचारित की जा रही इस 23 वर्षीय युवती को उपचार के लिए अमेरिका अथवा इंग्लैंड क्यों नहीं भेजा गया?


शार्ट बाउल सिंड्रोम का हब है अमेरिका : यहां के चिकित्सकों का कहना है कि अमेरिका में नेब्रास्का, पिट्सबर्ग, न्यूयार्क, वाशिंगटन डीसी और अटलांटा में छोटी आंत का प्रत्यारोपण अर्थात शार्ट बाउल सिंड्रोम के उपचार के स्टेट ऑफ आर्ट अस्पताल हैं, जहां गंभीर से गंभीर मरीजों पर शोध होते रहते हैं


नेब्रास्का स्थित शार्ट बाउल सिंड्रोम अस्पताल की विश्व में दो दशक से एक स्टेट ऑफ आर्ट अस्पताल के रूप में गणना होती है, जहां छोटी आंत प्रत्यारोपण के प्रतिवर्ष एक से डेढ़ सौ सफल ऑपरेशन होते हैं।


न्यूयार्क स्थित छोटी आंत प्रत्यारोपण टीम विशेषज्ञ डा. विभा सूद अमेरिका के विभिन्न बड़े अस्पतालों में काम कर चुकी हैं। डा. सूद ने इस लड़की की मृत्यु पर गहरा अफसोस जाहिर करते हुए बताया कि इंफेक्शन के साथ शार्ट बाउल सिंड्रोम का मामला गंभीर तो है, पर ऐसा नहीं है कि अमेरिका में इसे पेंचीदा कहा जाए।


डा.  सूद बताती हैं कि एक एडल्ट में करीब तीन मीटर से आठ मीटर तक की छोटी आंत होती है। छोटी आंत के रक्त प्रवाह के रुक जाने से छोटी आंत का गैंग्रीन हो जाता है। इस पर प्रत्यारोपण सर्जन की कोशिश रहती है कि वह रोगग्रस्त आंत से छोटा सा टुकड़ा बचा ले ताकि वह मरीज को बचाने में कामयाब हो सके।


बची-खुची छोटी आंत के रिहैबिलिटेशन के लिए इंटेस्टनेल रिहैब्लिटेशन सेंटर में उपचार किया जाता है, जो सभी संसाधनों से परिपूर्ण होते हैं। डा. सूद ने दावा किया कि उनके अपने अस्पताल में जब 23 सप्ताह के प्रिमेच्योर बेबी की गैंग्रस छोटी आंत को रेहैबिलिटेट कर बचाया जा सकता है, तो फिर उस लड़की को क्यों नहीं।


डा. सूद कहती हैं कि यह उनकी समझ से परे की बात है कि सामूहिक दुष्कर्म से पीडि़त लड़की को सफदरजंग अस्पताल में दस दिन तक रखकर उपचार करने का क्या औचित्य था? बेहतर यह होता कि इस रोग से संबंधित चिकित्सकों की एक टीम बनाई जाती जो अमेरिका अथवा इंग्लैंड के बड़े अस्पतालों से संपर्क रखते हुए घटना के पहले 48 घंटों में मरीज को उपचार के लिए अमेरिका रवाना कर देती।


अमेरिका में चर्चा का विषय :


अमेरिका में प्रवासी भारतीय चिकित्सकों के सवाल हैं कि क्या भारत में महिलाओं के मान सम्मान का कोई अर्थ नहीं रह गया है? पड़ोसी देश पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी घटना के 24 घंटे के अंदर मलाला यूसुफजई को विशेष विमान से लंदन के क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में उपचार के लिए भेजकर दुनिया भर के लोगों को मलाला की जान की सलामती का संदेश दे सकते हैं तो फिर भारतीय हुक्मरान क्यों चूक गए?


उसे सफदरजंग अस्पताल में दस दिन क्यों रखा गया। इस मरीज की हालत लाइलाज हो गई थी, तो फिर हमारे राजनीतिक आकाओं ने सिंगापुर को ही क्यों चुना?


अमेरिका के करीब सभी बड़े समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भारतीय राजधानी में दुष्कर्म और फिर उस युवती की निर्मम पिटाई के बाद उसे बस से बाहर फेंक देने की इस घटना को सुर्खियों में प्रकाशित किया।


यह घटना अमेरिका के बड़े शहरों में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक भारतीय चिकित्सक को यह कहते सुना गया कि जिस तरह अमेरिकी प्रशासन अपने देश में बंदूक संस्कृति को नियंत्रित करने में गन राइट लॉबी से जूझ रहा है, ठीक उसी तरह भारतीय हुक्मरान भी रेप और करप्शन पर काबू पाने में निष्फल सिद्ध हो रहे हैं।

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