'पार्टी भले ही राज ठाकरे चला रहे हों लेकिन वह शरद पवार की बेनामी पार्टी है'
Source: इंद्रकुमार जैन | Last Updated 02:56(10/02/12)
मुंबई. महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुधीर मुनगंटीवार का दावा है कि विदर्भ की तीनों महानगरपालिकाओं के चुनाव में भाजपा, शिवसेना, रिपब्लिकन महायुति को ही सफलता मिलेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि 7 तारीख को हुए जिला परिषद चुनाव में नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर समेत राज्य में कुल आठ से दस जिलापरिषदों में महायुति को सत्ता मिलेगी।
भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को ऊपरी तौर पर भले ही राज ठाकरे चला रहे हों लेकिन वह पार्टी वास्तव में केंद्रीय कृषिमंत्री शरद पवार की बेनामी राजनीतिक पार्टी है जिसका इस्तेमाल भाजपा शिवसेना को सत्ता में आने से रोकने के लिए किया जाता है। चंद्रपुर के विधायक व प्रदेश भाजपा के प्रमुख श्री मुनगंटीवार ने कई मुद्दों पर बात की।
पेश है बातचीत के मुख्य अंश
सवाल-आगामी महानगरपालिका चुनावों में भाजपा-शिवसेना-रिपब्लिकन महायुति को कितनी कामयाबी मिलेगी?
मुनगंटीवार-फिलहाल दस में से पांच मनपा में युति का कब्जा है। पर हमें भरोसा है कि इस संख्या में बढ़ोतरी होगी। विदर्भ की तीनों मनपा यानी नागपुर, अमरावती व अकोला हमारे ही पास रहेंगी। रामदास आठवले के हमारे साथ आने से दलित समाज को हमारे नजदीक आने का मौका मिला है और वे समझ गए हैं कि जाति व धर्म के नाम पर अब तक कांग्रेस ने उनके साथ अन्याय किया है।
सवाल-जिला परिषद चुनाव से उम्मीदें?
मुनगंटीवार-इस वक्त 27 में से 23 जिला परिषदों में कांग्रेस-राष्ट्रवादी की सत्ता है। लेकिन अब हालात बदलेंगे और भाजपा अकेले ही छह जिला परिषदों में जीत दर्ज करेगी। इनमें विदर्भ की तीन जिला परिषदें-नागपुर, वर्धा व चंद्रपुर शामिल हैं। शिवसेना के साथ हम जलगांव व संभाजीनगर में विजयी होंगे। बाकी जिला परिषदों में हम सक्षम विरोधी दल के रूप में काम कर सकेंगे।
सवाल-मुंबई में मनसे का क्या प्रदर्शन रहेगा?
मुनगंटीवार-मुंबई महानगर समुद्र के किनारे बसा है और मनसे पर समुद्र का सिद्धांत ही लागू होता है। यानी समंदर में जिस तरह ज्वार-भाटा आता है उसकी तरह मनसे के ज्वार यानी बढ़ने का दौर समाप्त हो गया है और अब सिर्फ भाटा यानी उतार का समय शुरू है। मतलब साफ है कि मनसे की हवा पहले जैसी नहीं रही। मनसे दरसअल राष्ट्रवादी के अध्यक्ष शरद पवार की बेनामी राजनीतिक पार्टी है।
जब पवार साहब को लगा कि मुंबई, ठाणो, नाशिक व पुणो में भाजपा-शिवसेना को रोकना कांग्रेस-राष्ट्रवादी के लिए संभव नही है तब उन्होंेने युति के वोटों में विभाजन के लिए मनसे बनवाई। मनसे का इस्तेमाल किसी उद्योगपति की बेनामी संपत्ति की तरह राष्ट्रवादी की ओर से किया जाता है।
सवाल-प्रचार में आपके पास कौन से मुद्दे हैं?
मुनगंटीवार-दोनों कांग्रेस के नेता भले ही हमें जातिवादी कहें, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य की आम जनता भ्रष्टाचार, महंगाई, लोडशेडिंग, नक्सलवाद, कुपोषण, महिलाओं पर अत्याचार व सरकारी खजाने पर दो लाख 80 हजार करोड़ के कर्ज से त्रस्त हो गई है।
राज्य को विनाश की ओर ले जा रहे कांग्रेसी गठबंधन को कोई समझदार मतदाता वोट नहीं करेगा। मंत्रियों के वस्त्रहरण के जरिए लोग अब इनके असली चेहरे भी देख रहे हैं।
सवाल-उपमुख्यमंत्री अजित पवार की कार्यशैली की आप अकसर आलोचना करते हैं?
मुनगंटीवार-अजित पवार लंबे अरसे से मुख्यमंत्री बनने के मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं। उनका व्यवहार राजनीति में सभ्यता के दायरे में नहीं आता। उधर शरद पवार भी पारिवारिक बंटवारे की तरह बेटी सुप्रिया व भतीजे अजित के बीच बंटवारा कर रहे हैं। बेटी को राष्ट्रीय राजनीति के लिए व भतीजे को राज्य की राजनीति के लिए छोड़ देना निजी संपत्ति को बांटने जैसा है।
सवाल-मुंबई में कांग्रेस आघाड़ी की चुनौती को किस तरह देखते हैं?
मुनगंटीवार-उन्हें विकास के लिए मुंबई महानगरपालिका नहीं चाहिए। अगर विकास कर सकते तो पुणो और पिंपरी-चिंचवड़ में क्यों नहीं कर पाए? वे भ्रष्टाचार करने के लिए ही मुंबई की सत्ता चाहते हैं। दोनों कांग्रेस के नेता मनपा में गड़बड़ियों के आरोप लगाते हैं।
पर मनपा में आयुक्त तो सरकार का ही होता है। मौजूदा आयुक्त तो मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के खास हैं। अगर धांधली हो रही थी तो आयुक्त ने रोका क्यों नहीं? हर फाइल पर आयुक्त क ी मंजूरी जरूरी है। फिर गलत काम कैसे हुए? यानी इसके लिए मुख्यमंत्री भी दोषी हैं। स्थाई समिति में दोनों कांग्रेस के साथ मनसे के सदस्य भी हैं। उन्होंने सभी फैसले एकमत से कैसे हुए?