साल 2006 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए धमाकों के आरोप में मुंबई जेल में बंद 9 आरोपियों में से सात आज आजाद हो गए। जेल से छूटने के बाद यह लोग अब मालेगांव में अपने गांव जाएंगे। इन लोगों की रिहाई के लिए पिछले सात महिने से भूख हड़ताल भी चल रही थी। जब ये गांव पहुंचेंगे तो इनका स्वागत भी किया जाएगा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की विशेष अदालत ने शनिवार को वर्ष 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट के सभी नौ आरोपियों को जमानत दे दी थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इसका विरोध न करने का निर्णय लिया था। इस विस्फोट में 37 लोग मारे गए थे।
इन आरोपियों में से प्रत्येक को 50,000 रुपये के मुचलके के साथ इस शर्त पर जमानत दी गई कि वे अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।
एनआईए से पहले इस मामले की जांच कर रहे महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता ने अल्पसंख्यक बहुल मालेगांव कस्बे में हुए विभिन्न विस्फोटों में कथित संलिप्ताता के आरोप में जिन नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया था उनमें शाबिर अहमद, सलमान फारसी, रईस अहमद, नूरुलहुदा दोहा, आसिफ खान, मोहम्मद अली, फारूक अंसारी, जावेद शेख और अबरार अहमद शामिल हैं।
मोहम्मद अली और आसिफ खान को छोड़कर बाकी सभी आरोपी आज रिहा हो गए। ये दोनों आरोपी लगातार पांच साल से जेल में कैद हैं क्योंकि वे मुम्बई में 11 जुलाई 2006 को कई रेलगाड़ियों में हुए विस्फोट के भी आरोपी हैं।
सरकारी वकील रोहिणी सालियन के मुताबिक मोहम्मद अली और आसिफ खान इस मामले में जमानत मिलने के बावजूद रिहा नहीं किए गया क्योंकि 7/11 के मामले में भी कथित तौर पर उनकी संलिप्तता रही है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव कस्बे में हुए विस्फोट मामले के नौ आरोपियों ने जमानत के लिए याचिका इस वर्ष अक्टूबर में दायर की थी। उल्लेखनीय है कि मालेगांव की एक मस्जिद में आठ सितम्बर 2006 को कई विस्फोट हुए थे जिनमें 37 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। आरोपियों ने इससे पहले मार्च में भी जमानत याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।