थाने में हुआ थानेदार गिरफ्तार, एक के बाद एक खुले कई राज
नागपुर। सोनेगांव के थानेदार अरुण राउतवार को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एसीबी) के दस्ते ने उनके ही थाने में गिरफ्तार कर लिया।
राउतकर ने थाने से भागने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं रहे। कार्रवाई नागपुर एसीबी के अधीक्षक निशीथ मिश्र के मार्गदर्शन में सोमवार की सुबह करीब 11.20 बजे की गई। राउतवार की गिरफ्तारी से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
1 लाख लेकर भी नहीं हुए हाजिर
आरोप है कि थानेदार राउतवार ने कांचन कीर्ति मुदगल नामक महिला आरोपी की जमानत अर्जी पर अदालत में हाजिर होकर पुलिस का पक्ष रखने के लिए 2 लाख की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 25 हजार लेते हुए रंगेहाथों पकड़े गए।
राउतवार 2 लाख में से एक लाख की रकम पहले ही ले चुके हैं। सोमवार को एसीबी के शिकंजे में आने के बाद वे दस्ते के कर्मियों को झटका देकर थाने के पिछले दरवाजे से भागने का प्रयास किया। थाने के चारो ओर एसीबी दस्ते के जवान घेरा डाले खड़े थे।
पद का फायदा उठाया
तहसील उमरेड, कावरापेठ निवासी दत्तात्रय बलिराम मुदगल (75) ने गत 22 सितंबर को एसीबी के अधीक्षक निशीथ मिश्र से मुलाकात की। दत्तात्रय ने श्री मिश्र को बताया कि उनकी बहू कांचन कीर्ति मुदगल (45) वर्धा मार्ग स्थित डीवाई पाटील इंटरनेशनल स्कूल में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम करती थी।
स्कूल में हुए 42 लाख के गबन के मामले में कांचन को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सोनेगांव पुलिस ने इस प्रकरण में स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी राकेश भंडारी, प्राचार्य शिव संतोष झा और प्रबंधक बंटी झा के खिलाफ मामला दर्ज किया था। कांचन को अदालत से पीसीआर के बाद जेल भेज दिया गया।
दत्तात्रय अपनी बहू को जेल से छुड़ाने के लिए थानेदार अरुण राउतवार से मुलाकात किए। राउतवार जब तक अदालत में हाजिर होकर पुलिस पक्ष की ओर से रिपोर्ट दाखिल नहीं करते तब तक अदालत कांचन की जमानत अर्जी पर सुनवाई नहीं करेगी। इसी बात का फायदा उठा कर राउतवार ने दत्तात्रय से दो लाख रुपए मांगे।
बिना पैसे सुनने को तैयार नहीं
दत्तात्रय का आरोप है कि राउतवार उनसे एक लाख रुपए पहले ले चुके थे और अदालत में हाजिर होने की बात की थी। गत दिनों कांचन की जमानत अर्जी पर सुनवाई की तारीख थी, लेकिन राउतवार के अदालत में हाजिर नहीं होने से कांचन को फिर जेल भेज दिया गया।
दत्तात्रय ने 22 सितंबर को राउतवार से पुन: मुलाकात की। तब राउतवार ने उनसे बकाया रकम मांगा और कहा जब तक वह रकम नहीं देंगे तब तक वह कांचन की जमानत नहीं होने देंगे। दत्तात्रय ने बकाया रकम जुटाने में असमर्थता जताई।
तब राउतवार ने उनसे 50 हजार मांगे। दत्तात्रय ने इसके लिए भी इंतजाम न हो पाने की बात कही। तब राउतवार ने उन्हें थाने से वापस भेज दिया। 24 सितंबर को कांचन की जमानत अर्जी पर फिर सुनवाई थी।
राउतवार ने दत्तात्रय से संपर्क किया और अदालत में हाजिर होने के लिए 25 हजार रुपए मांगे। तब दत्तात्रय ने रिश्वत न देने का निर्णय लिया और 22 सितंबर को एसीबी कार्यालय पहुंचकर अधीक्षक निशीथ मिश्र को सारी कहानी सुनाई।
अपने ही थाने के लॉकअप में बंद हुए
श्री मिश्र ने एसीबी के उपाधीक्षक संजय पुरंदरे को जाल बिछाकर कार्रवाई का आदेश दिया। राउतवार, नागपुर एसीबी दस्ते के सभी कर्मियों को जानते थे, इसलिए कार्रवाई के लिए वर्धा एसीबी दस्ते के कर्मियों को नागपुर बुलाया गया। दस्ते ने सोनेगांव थाने में जाल बिछाया।
सोमवार को सुबह राउतवार थाने में दत्तात्रय के आने का इंतजार कर रहे थे। दत्तात्रय ने उन्हें जैसे ही 25 हजार रुपए दिए, एसीबी दस्ते ने धर दबोचा। चंगुल में फंसने के बाद वे थाने से भागने का प्रयास किए, लेकिन गिरफ्तार कर लिए गए।
उनके गिरफ्तार होते ही इस बात की चर्चा महकमे में फैल गई कि जिस थाने के लॉकअप में वे आरोपियों को बंद करते थे। सोमवार को रात भर उन्हें भी उसी लॉकअप में रखा जाएगा।
डेढ़ लाख की हुई थी बात
दत्तात्रय से राउतवार ने दो लाख मांगे थे, लेकिन बातचीत डेढ़ लाख में तय हुई थी। दत्तात्रय का आरोप है कि राउतवार उनसे एक लाख रुपए लेने के बाद भी अदालत में हाजिर नहीं हुए थे।
आरोपी थानेदार को आज अदालत में पेश किया जाएगा। पिछले तीन माह में अब तक विभिन्न मामलों में 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। निशीथ मिश्र, अधीक्षक एसीबी
क्या था प्रकरण
दत्तात्रय मुदगल की बहू कांचन कीर्ति मुदगल के खिलाफ अगस्त 2012 में सोनेगांव थाने में स्कूल में 42 लाख के गबन करने का प्रकरण दर्ज है। कांचन ने डीवाई पाटील इंटरनेशनल स्कूल में अपने पद पर रहते हुए 28 विद्यार्थियों से वसूली गई नगदी और चेक समेत 42 लाख रुपए का गबन किया।
आरोपी कांचन ने विद्यार्थियों को कच्ची रसीद दी। असली रसीद में भी हेरफेर किया। यह बात राकेश, शिव और बंटी को मालूम होने पर उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया।
आरोप है कि बंटी ने प्राचार्य शिव और राकेश को धमकी दी थी। प्रकरण में उक्त चारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। उस समय कांचन को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। तब से कांचन जेल में है।
कई पीड़ित पहुंचे एसीबी कार्यालय
राउतवार से कई लोग पीड़ित हैं। राउतवार की गिरफ्तारी की खबर सुनने के बाद कई पीड़ित एसीबी अधीक्षक कार्यालय में अपनी व्यथा सुनाने पहुंचे थे। सूत्रों ने बताया कि राउतवार को थाने के किसी कर्मचारी पर भरोसा नहीं था। इसलिए वह इस तरह की लेन-देन में किसी की मध्यस्थता पसंद नहीं करते थे।
वह खुद लेनदेन की बात अपनी केबिन में करते थे। मनीष नगर निवासी पीड़ित प्रवीण थुटे ने बताया कि उनकी पत्नी स्नेहल को खापरखेडा स्थित चक्रधर प्रभु स्कूल में शिक्षिका की नौकरी के लिए उन्होंने स्कूल के सर्वेसर्वा लक्ष्मण बेलसरे को 11.50 लाख रुपए दिए थे।
बेलसरे ने उनकी पत्नी को नौकरी नहीं दी। उसके बाद वे सोनेगांव थाने में बेलसरे के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत किए थे। राउतवार ने जांच के नाम पर उससे (प्रवीण) 40 हजार रुपए लिये थे।
रिपोर्ट दिए हुए तीन महीने से अधिक समय बीत गया, लेकिन बेलसरे के खिलाफ राउतवार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। उसके बाद प्रवीण ने अदालत में गुहार लगाई।
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