राज्यदिल्ली
मध्य प्रदेश
राजस्थान
छत्तीसगढ़
हिमाचल
पंजाब
हरियाणा
चंडीगढ़
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
महाराष्ट्र
गुजरात
जम्मू-कश्मीर
आश्चर्यजनक रूप से राज ठाकरे बने उद्धव के सारथी
bhaskar news | Jul 17, 2012, 03:35AM IST

डॉक्टरों ने एंजियोग्राफी करने के बाद उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी। अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने के बाद मनसे अध्यक्ष एवं उनके चचेरे भाई राज ठाकरे ने तमाम राजनीतिक गिले-शिकवे को परे रख कर खुद कार ड्राइव की और उद्धव को लेकर मातोश्री बंगले पहुंचे। राज और उद्धव के बीच इस पारिवारिक मुलाकात से शिवसैनिकों और मनसे कार्यकर्ताओं में दोनों भाईयों के बीच राजनीतिक रिश्ते सुधरने की उम्मीद जगी है।
उद्धव के लीलावती अस्पताल में भर्ती होने की खबर जब राज ठाकरे को मिली तब वे दो दिवसीय अलीबाग के दौरे पर निकल चुके थे। परंतु उन्होंने अपना यह दौरा बीच में ही छोड़ दिया और दोपहर को सीधे लीलावती अस्पताल पहुंचे। मनसे प्रमुख के साथ उनकी मां और पत्नी भी थी। अस्पताल पहुंच कर राज ने डॉक्टरों से चचेरे भाई उद्धव के स्वास्थ्य की जानकारी हासिल की।
शिवसेना नेता मनोहर जोशी ने बताया कि दोनों भाईयों के बीच करीब ३क् मिनट तक पारिवारिक चर्चा हुई। डॉक्टरों ने एंजियोग्राफी होने के बाद उद्धव को पूरी तरह से स्वस्थ्य बताया। बता दें कि राज ठाकरे ने दोपहर को उद्धव से मुलाकात तो की ही साथ ही शाम को जब डॉक्टरों ने डिस्चार्ज किया तो वे खुद उन्हें लेने अस्पताल पहुंचे। इतना ही नहीं राज ने खुद कार चलाकर उद्धव के साथ कई वर्षो बाद मातोश्री बंगले में कदम रखा। इस मौके पर मातोश्री के बाहर सैकड़ों शिवसैनिक और मनसे कार्यकर्ता उपस्थित थे।
चाचा-भतीजे में नहीं हुई मुलाकात
उद्धव ठाकरे के साथ राज ने मातोश्री बंगले में प्रवेश तो किया परंतु यहां उनकी शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे से मुलाकात नहीं हो पाई। बताया जाता है कि मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे मातोश्री बंगले में करीब ४क् मिनट तक थे। परंतु बाल ठाकरे उनसे मिलने बंगले की ऊपरी मंजिल से नीचे नहीं उतरे। इससे पहले राज और उद्धव 2008 में मिले थे। उस वक्त बाल ठाकरे को कार्टून की किताब लौटाने राज मातोश्री पहुंचे थे। 2011 में मजदूर रैली में दोनों साथ तो आए थे, लेकिन कोई बात नहीं हुई थी।
शिवसेना और मनसे के एक साथ आने की उम्मीद जगी
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे सोमवार को जिस तरह से चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से मिलने लीलावती अस्पताल पहुंचे और बाद में उन्हें लेकर मातोश्री बंगले गए, उसके बाद महाराष्ट्र में एक बार शिवसेना और मनसे के करीब आने की संभावना जगी है। महाराष्ट्र की विधानसभा में शिवसेना के ४५ और मनसे के १२ विधायक हैं। माना जा रहा है कि यदि २क्१४ के लोकसभा चुनाव के वक्त शिवसेना, भाजपा और आरपीआई (ए) के महागठबंधन को राज ठाकरे की मनसे का साथ मिल जाता है तो चुनाव परिणाम चौंकाने वाला होगा। हालांकि दोनों दलों के बड़े नेता सोमवार की मुलाकात को पारिवारिक मुलाकात बता रहे हैं और शिवसेना व मनसे के बीच चुनावी गठबंधन होने की बातों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।






