नागपुर. रचनात्मकता उम्र की मोहताज नहीं होती। शहर के प्रसिद्ध इतिहासकार, शायर व साहित्यकार डॉ. शफरुद्दीन साहिल इसी की मिसाल हैं। 63 की उम्र में आंखें कमजोर हो रही हैं, लेकिन अध्ययन की पिपासा कागज को आंखों के करीब लाकर जरूरत पूरी कर देती है।
शिक्षा में पिछड़े माने जाने वाले समाज से ताल्लुक होने के बावजूद श्री साहिल ने बी.ए. एम.ए.(उर्दू,फारसी, अरबी), बी.एड व दो बार पीएचडी की। अपनी जिंदगी के सफर में अब तक उनकी 36 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। विक्रम यूनिवर्सिटी उज्जैन से एक छात्रा ने श्री साहिल पर ही शोध कर पीएचडी हासिल की है।
बिना किसी सरकारी सहायता वाली उनकी खुद की एक लायब्रेरी भी है, जिसमें करीब 2000 पुस्तकें हैं। साहिल इसे ही अपना बेशकिमती खजाना मानतें हैं।
वे राज्य उर्दू अकादमी से 5 बार, उत्तरप्रदेश उर्दू साहित्य अकादमी, मीर अकादमी लखनऊ, त्रिशताब्दी समारोह, इंडियन चईन सोसायटी, नागपुर संस्कृत संवर्धन मंच सहित कई संस्थाओं द्वारा पुरस्कार व सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।
इसी कड़ी में अब उन्हें आगामी 14 फरवरी को राजा मुधोजी महाराज उर्फ अप्पासाहब भोंसले द्वितीय स्मृति पुरस्कार भी जुड़ने जा रहा है। विदर्भ गौरव का खिताब हासिल कर रहे साहिल के साहित्य, शायरी का सफर जारी है। कलम है कि किसी साहिल पर थमने का नाम नहीं लेती। रुकती है तो सिर्फ नमाज के वक्त।
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