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प्रसूति विशेषज्ञ के बिना हैं मनपा अस्पताल
bhaskar news
| Jul 17, 2012, 07:07AM IST
यह खुलासा सोमवार को मनपा सदन में स्वास्थ्य विभाग प्रमुख डॉ. सविता मेश्राम ने किये। इन खामियों के बीच सत्तापक्ष द्वारा लाये गए उपचार सुविधाओं में शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव को मुंह की खानी पड़ी। भारी विरोध के बाद महापौर प्रा. अनिल सोले ने इस प्रस्ताव को प्रशासन को वापस लौटाते हुए रुग्णालय समिति की अध्यक्ष डॉ. आंबटकर को प्रस्ताव की जांच कर, इसे समिति के माध्यम से सभागृह में रखने का निर्देश दिया।
भारी विरोध के बाद वापस लौटाया प्रस्ताव
रुग्णालय समिति की अध्यक्ष डॉ. सफलता आंबटकर ने भी इन खामियों का खुलासा करते हुए कहा कि महल-सदर निदान केंद्र में एक्स-रे बंद है। सोनोग्राफी भी खराब है। अनेकों मशीनें अपग्रेड नहीं हुई हैं। इंदिरा गांधी अस्पताल में प्रसूति विशेषज्ञ नहीं होने से कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों के पद रिक्त होने से प्रत्येक डॉक्टर को सप्ताह में एक बार 24 घंटे डच्यूटी करनी पड़ रही है।
अत्यावश्यक उपकरण नहीं हैं। डॉ. सविता मेश्राम व डॉ. सफलता आंबटकर के इन खुलासों से सदन अवाक रह गया। आस्थापना विभाग रिक्त पदों पर कोई जवाब नहीं दे पाया। प्रशासन की बोलती बंद होने से सत्तापक्ष को भी मुंह की खानी पड़ी। सत्तापक्ष नेता प्रवीण दटके, विपक्ष नेता विकास ठाकरे, प्रफुल्ल गुडधे, प्रकाश गजभिये, सुधाकर कोहले, मायाताई इवनाते, डॉ. उमा गाठीबांधे आदि ने शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए पहले बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा।
इसका संज्ञान लेते हुए महापौर प्रा. अनिल सोले ने शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव वापस प्रशासन को लौटा दिया। महापौर ने कहा कि यह प्रस्ताव रुग्णालय समिति को भेज रहा हूं। समिति मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा करे, इसकी संपूर्ण जांच हो। उसके बाद ही यह रिपोर्ट सभागृह में रखी जाए।
तीन वर्ष से नहीं हुई है सेवा शुल्क में वृद्धि
मनपा प्रशासन ने उपचार सेवा शुल्क में वृद्धि का प्रस्ताव सदन में रखा था। प्रशासन का पक्ष है कि पिछले 3 सालों से शुल्क में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए शुल्क वृद्धि प्रस्तावित की जा रही है। इसका राकांपा नगरसेवक प्रकाश गजभिये ने जोरदार विरोध किया। श्री गजभिये ने अस्पतालों में खामियों को गिनाते हुए शुल्क वृद्धि को तुरंत रद्द करने की मांग की। विपक्ष नेता विकास ठाकरे, सुधाकर कोहले आदि ने शुल्क वृद्धि पर ऐतराज जताते हुए अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को गिनाया।
महापौर ने प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया। स्वास्थ्य विभाग प्रमुख डॉ. सविता मेश्राम ने अस्पतालों की दयनीय अवस्था को स्वीकारते हुए बताया कि 103 डॉक्टरों के पद मंजूर हैं, जिसमें सिर्फ 66 कार्यरत हैं। 190 नर्स में से 102 कार्यरत हैं। अटेंडेंट की भी यही स्थिति है। प्रसूति विशेषज्ञ नहीं हैं। अस्पतालों की मरम्मत के लिए कई पत्र दिए, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। रात्रि पारी के लिए डॉक्टर नहीं हैं। आरसीएच व हेल्थ पोस्ट डॉक्टर की डच्यूटी लगाकर काम किया जा रहा है।








