आदिवासी विकास विभाग की छह फाइलें हाईकोर्ट ने जब्त कीं

मुंबई. बांबे हाईकोर्ट ने गुरुवार को आदिवासी विभाग में भ्रष्टाचार व निधी के दुरूपयोग से संबंधित छह फाइलों को जब्त कर लिया। इसके साथ ही इस मामले की जांच में निष्क्रियता के लिए पुलिस व सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई।
न्यायमूर्ति वीएम कानडे व न्यायमूर्ति प्रमोद कोदे की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता बहिराम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हैरानी जताई कि पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई आपराधिक मामला क्यों नहीं दर्ज किया?
प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर दिखाई देता है। खंडपीठ ने पुलिस को सोमवार तक इस मामले की प्रगति रिपोर्ट पेश करने व फाइलों को कोर्ट रजिस्ट्रार की निगरानी में रखने का निर्देश दिया।
इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील राजेंद्र रघुवंशी ने कहा कि आदिवासियों के कल्याण व उनको दी जानेवाली चीजों की खरीदी के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।
एक फाइल का हवाला देते हुए रघुवंशी ने कहा कि 31 मार्च 2006 को मंत्री रहते हुए विजय कुमार गावित ने एक दिन में तीस करोड़ की राशि आवंटित की।
उन्होंने कहा कि कुछ पैसे फर्जी कंपनी के नाम पर भी जारी किए गए। इस बात को जानने के बाद खंडपीठ ने कहा कि सीबीआई सिर्फ एक मामले की जांच क्यों कर रही है।
इस तरह के दूसरे मामले की ओर ध्यान क्यों नहीं देती। वर्तमान में सीबीआई आश्रम शाला के लिए खरीदी गई चीजों की खरीददारी में हुए घपलेबाजी की जांच कर रही है।
रघुवंशी ने कहा कि सबसे ज्यादा घपलेबाजी खरीद फरोख्त में हुई है। चटाई व पौष्टिक आहार की खरीदी में करोड़ों रुपए खर्च किए गए।
उन्होंने कहा कि पौष्टिक आहार अच्छी गुणवत्ता के नहीं थे। इसके अलावा 800 रुपए के गैस बर्नर 2000 हजार रुपए में खरीदे गए है। आदिवासियों के विकास के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हंै।
लेकिन खर्च की जानेवाली रकम में कोई पारदर्शिता नहीं दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि विभाग में जारी भ्रष्टाचार को लेकर 2010 व 2011 में नंदुरबार व धुले पुलिस स्टेशन को दो पत्र लिखे गए लेकिन अब तक एफआईआर नहीं दर्ज की गई है।






