नागपुर। बीते एक साल में इस धंधे की शिकार कहीं मासूम लड़कियां बनी तो कहीं, बड़े घरों की लड़कियों के बहके कदम उन्हें यहां तक खींच लाए।
इस ख़ास कड़ी में हम आपको बता रहे हैं इस धंधे से जुड़ा सच जिसे करने के बाद हर लड़की को अपना नाम और मुंह छुपाना पड़ता है। इस स्टोरी में पिछले एक साल में पड़े छापों और उनके बाद हुए चौंकाने वाले सच की पूरी पड़ताल की गई है।
3 दिसंबर 2011 की बात है। तत्कालीन पुलिस उपायुक्त निशिथ मिश्र को जानकारी मिली कि लाहोरी में धंधा चल रहा है।
रात 1.30 बजे होटल को पुलिस ने घेरा। होटल का नजारा लज्जास्पद था। हाइप्रोफाइल युवतियों के साथ रंगरेलियां मनाते हुए एक उद्यमी व अभियंता को पकड़ा गया।
मुकेश नामक उद्यमी रायपुर से यहां आया था। विजय नामक अभियंता मनसर क्षेत्र में मॉयल में कार्यरत था। खुलासा हुआ कि शहर में अन्य क्षेत्रों से ऐसे लोग मौज मनाने आते हैं, जो वाम मार्ग से लाखों-करोड़ों रुपए कमाने का हुनर जानते हैं।
पुलिस के पहुंचते ही नीता व रेखा (दोनों परिवर्तित नाम) छत पर टंकी की आड़ में जा छुपी थीं। उन्हें नाटकीय तौर पर पकड़ा गया।
जांच में पता चला कि नीता व रेखा हाइप्रोफाइल कालगर्ल हैं। रेखा दार्जिलिंग की है, जबकि नीता मध्यप्रदेश की। रेखा का सौदा 30 हजार रुपए में हुआ था। नीता 20 हजार रुपए में तय हुई थी। महेश पवार नामक युवक को युवती मुहैय्या (सप्लाय) कराने के आरोप में पकड़ा गया था।
पुलिस को यह भी पता चला कि रेखा माह में 3 लाख रुपए कमा लेती है। वह विभिन्न महानगरों में हवाई जहाज से आना-जाना करती है। नागपुर में आने से पहले वह गोवा व मुंबई में पैकेज पर थी। नागपुर के अन्य स्थानों पर भी वह आ जा चुकी थी।