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बेरोजगार-बीमार हो तो भी पत्नी को दो गुजारा भत्ता

Bhaskar News | Dec 19, 2012, 03:24AM IST
बेरोजगार-बीमार हो तो भी पत्नी को दो गुजारा भत्ता

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक तलाक की स्थिति में पति को अपनी बीमारी या बेरोजगारी के बावजूद पत्नी को गुजरा भत्ता देना होगा। जस्टिस रोशन दलवी ने याचिकाकर्ता सूर्यकांत तिवारी की अपील खारिज करते हुए उसे यह आदेश दिया।



निचली अदालत ने तिवारी को आदेश दिया था कि वह पत्नी को पांच हजार रुपए मासिक गुजारा भत्ता दे। इसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 


 


कोर्ट ने कहा कि तलाक याचिका की सुनवाई पूरी होने तक भत्ता नियमित रूप से दिया जाए। तिवारी ने याचिका में दावा किया है कि बीमारी की वजह से उसकी नौकरी चली गई।


 


उन्होंने कई प्रमाणपत्र और रिपोर्ट पेश कीं। इनसे पता चलता है कि उन्हें एचआईवी संक्रमण और टीबी सहित कई बीमारियां हैं।तिवारी ने दावा किया कि वह एचआईवी के इलाज में हर महीने 3,900 रुपए खर्च करता है।



उसके पास रोजगार भी नहीं है। इसलिए वह गुजारा भत्ता देने की स्थिति में नहीं है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह सभी पहलू सुनवाई के दौरान देखे जाएंगे।


 


जिरह के दौरान उसे अपने दावे साबित करने होंगे। तिवारी पेशे से इंजीनियर है। वह नौकरी के समय हर महीने 19 हजार रुपए कमा रहा था।


माता-पिता को दो गुजारा भत्ता 



एजेंसीत्ननई दिल्ली, दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को आदेश दिया है कि बुजुर्ग माता-पिता को प्रतिमाह 3,200 रुपए गुजारा भत्ता दे। एडीशनल सेशन जज अनुराधा शुक्ला भारद्वाज ने कहा कि बेटा माता-पिता को मदद से इनकार नहीं कर सकता।


 


जज ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। जज ने कहा कि इस समय मकान उसकी मां के नाम है। इस लिहाज से बेटे को  प्रतिवादियों (माता-पिता) को किराया देना चाहिए। जैसे कि वे उसके मकान मालिक हैं।


किसी भी नजरिए से देखें याचिकाकर्ता (दंपति का बेटा) यह नहीं कह सकता कि वह गुजारा भत्ता देने के लिए उत्तरदायी नहीं है।



मामला दिल्ली का है। बेटे ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। कहा था कि वह साइकिल मरम्मत की एक छोटी सी दुकान चलाता है।


 


हर महीने पांच से छह हजार रुपए कमाता है। जबकि उसके बड़े भाई की आमदनी 20 हजार रुपए प्रतिमाह है। उसने आरोप भी लगाया कि उसके माता-पिता के पास तीन अचल संपत्तियां है। उन्होंने ब्याज पर लोगों को ऋण भी दे रखा है।



दूसरी तरफ उसके 74 वर्षीय पिता और 67 वर्षीय माता ने अदालत को बताया कि बेटे की चौपहिया वाहन सुधारने की दुकान है। उसकी महीने की आमदनी 35 हजार रुपए है। जबकि उसका बड़ा भाई गरीब है। अदालत ने बेटे की दलीलें खारिज कर माता-पिता के तर्क सही माने।
 

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