आत्मबल बढ़ाने के लिए करने होंगे उपाय : प्रभावलकर

नागपुर. दुष्कर्म पीडि़तों को न्याय देने की सक्षम पहल के साथ ही आत्मबल बढ़ाने की उपाय योजनाओं पर जोर देने की जरूरत है।
दुष्कर्म पीडि़तों के पुनर्वसन के लिए महिला आयोग ने नीतिगत योजना तैयार की है। यह कहना है राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य निर्मला प्रभावलकर का। औरंगाबाद के चर्चित प्रकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस प्रकरण के बाद केंद्रीय स्तर पर महिला न्याय कार्यक्रम मे सकारात्मक संशोधन किए गए।
पीडि़ता को पुलिस विभाग में नौकरी दी गई। पीडि़तों को अन्य आधार देने का भी प्रयास किया जा रहा है। वह शनिवार को दैनिक भास्कर कार्यालय में संपादकीय सहयोगियों से चर्चा कर रही थीं। दिल्ली दुष्कर्म मामले पर उन्होंने कहा कि उस संबंध में सूचना मिलते ही उन्होंने सरकारी महकमे से समुचित कार्रवाई के लिए कहा था। शेष पेज ४ पर
अन्य प्रकरणों की तरह इस प्रकरण में भी आरोपियों ने निशान नहीं छोडऩे की पूरी तैयारी की थी, लेकिन प्रशासन की सक्रियता के कारण वे पकड़े गए।
उन्होंने कहा कि दुष्कर्म मामले में चिकित्सकीय रिपोर्ट आने में 2 से 3 महीने लग जाते हैं। प्रकरण जब दर्ज होता है तब तक आरोपी बच निकलने के सारे उपाय कर चुके होते हैं।
परवरिश में बदलाव आवश्यक :
महिलाओं के साथ 80 प्रतिशत दुष्कर्म के मामले परिचितों द्वारा ही किए गए होते हैं। ऐसे में महिला को आत्मरक्षा के लिए तैयार होना पड़ेगा। कराटे, जूडो लड़कियों को सीखना होगा। लड़कियों को तीखा स्प्रे साथ लेकर चलना होगा। मनोवैज्ञानिक पीडि़ता को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने में सहायक हो सकते हैं। परवरिश में बदलाव जरूरी है।
उन्होंने कहा कि महाराष्टï्र में पिछले तीन वर्षों से महिला आयोग का अध्यक्ष नहीं होना दुखद है। हिरासत गृह के लिए सरकार से बजट में प्रावधान करने की मांग की जा चुकी है।
महिलाओं को वस्तु समझते हंै
प्रभावलकर ने बताया कि दुष्कर्मी को विकृत मानसिकता का कहना गलत है, बल्कि वे महिलाओं को वस्तु के रूप में देखते हैं। देश पुरुष शासित होने से यह मानसिकता बनी हुई है। दुष्कर्म के बाद महिला की हत्या विरलतम मामलों में से एक है। दोषी को इसमें कानून की आम धारा के तहत सजा नहीं मिलनी चाहिए, बल्कि इसके लिए अलग से धारा बननी चाहिए। इंटरनेट के माध्यम से परोसी जानेवाली अश्लील सामग्रियों पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है। दिल्ली की पैरामेडिकल छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म पर राजनीतिज्ञों द्वारा दिए गए बयान उनकी महिलाओं के प्रति संवेदनहीनता दर्शाते हैं।
महाराष्ट्र में मामले कम : उन्होंने बताया कि महाराष्टï्र में महिला दुष्कर्म से जुड़े मामले कम हैं, क्योंकि यहां समाजसेवी संगठन और प्रशासन ऐसे मामलों को लेकर काफी सक्रिय हैं। कड़े कानून व उन पर कड़ाई से पालन ही दुष्कर्म की घटनओं पर रोक लगा सकता है।









