भोपाल। गांव की वह बेहद खूबसूरत लड़की अपनी सहेलियों के साथ मस्ती में झूमते गाते हुए जा रही थी, तभी वहां से शिकार पर निकले राजपुरुष ने ग्वाले की युवा बेटी की सुरीली तान सुन ली। वह इस अप्रतिम खूबसूरती और सुरीली लड़की का दिवाना हो गया। इस युवती का गांव सारंगपुर था।
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यह युवा और कोई नहीं मालवा का सुल्तान था बाज बहादुर, जिसकी राजधानी मांडू थी। बाज बहादुर ने इस युवती रूपमती के सामने शादी का प्रस्ताव रखा और मांडू चलने का आग्रह किया तो वह सहमत हो गई। दोनों ने
हिंदू और मुस्लिम रीति से विवाह किया, क्योंकि बाज बहादुर मुस्लिम थे और रूपमती हिंदू थी।
रूपमती के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह क्षत्रिय नहीं थी, शायद वह गड़रिया या बा्रम्हण परिवार से थी। मांडू उस समय मालवा की राजधानी थी। यहां पर रानी रूपमती का खूबसूरत महल था, जिसका निर्माण 16 वी शताब्दी में किया गया था। रूपमती के इस महल में रेवा कुंड का निर्माण किया गया। रूपमती अपने इसी महल से नर्मदा के दर्शन करती थी।
संगीत प्रेमी नवाब बाजबहादुर रानी रूपमती के सौंदर्य और उसकी सुरीली तान में खोया हुआ था, जबकि रूपमती की खूबसूरती के किस्से चारो ओर फैल रहे थे। रूपमती की खूबसूरती के किस्से सुनकर अकबर के सेनापति अधम खान
ने उसे हासिल करने के लिए वर्ष 1561 में मांडू पर हमला कर दिया। हल्के प्रतिरोध के बाद नवाब बाजबहादुर की सेना अधम खान के सामने टिक नहीं सकी। बाज बहादुर सहायता मांगने के लिए चितौड़गढ़ भाग गया। लेकिन रूपमती महल में ही रह गईं।
आबरू के लिए दे दी जान : रानी रूपमती ने मांडू पर हुए हमले के दौरान पराजय को सिर पर खड़ा देख यह तय कर लिया कि वह अपनी जान दे देगी, लेकिन हमलावरों के हाथों में जिंदा नहीं जाएगी। आधम खान ने जब मांडू में प्रवेश किया तो उसे पता चला कि बंदी होने से बचने के लिए जहर खा लिया । इसके बाद रूपमती की मौत हो गई और अधम खान हाथ मलता रह गया। इस तरह रानी रूपमती और बाजबहादुर की एक प्रेम कहानी का दुखद अंत हो गया। लेकिन मांडू में खड़े ऐतिहासिक महल आज भी उस सच्ची प्रेम कहानी की गवाही दे रहे हैं।