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'आखिर कहां है पुलिस' : लूट के मामले में भोपाल अव्वल

विशाल त्रिपाठी | Dec 12, 2012, 05:18AM IST
'आखिर कहां है पुलिस' : लूट के मामले में भोपाल अव्वल

भोपाल. 853 से ज्यादा चोरियां, 173 लूट और 71 हत्या। ये आंकड़े राजधानी में इस साल हुई कुछ बड़ी वारदातों के हैं। इनमें से ज्यादातर मामलों में अपराधी अब तक पकड़ से बाहर हैं। राजधानी में अपराधों के बढ़ते ग्राफ पर लगाम नहीं लग पा रही है। बदमाश बेखौफ हो रहे हैं। आम आदमी, पुलिस की इस कार्यप्रणाली से नाराज है तो जनप्रतिनिधि भी खुश नजर नहीं आते। अब विधानसभा में भी कानून व्यवस्था पर चर्चा होने जा रही है। भास्कर ने जब बदमाशों के शिकार कुछ लोगों से बात की तो उन्होंने सवाल दागा कि 'पुलिस आखिर है कहां'?


विसं, भोपालत्नराजधानी में एक जुलाई से 15 नवंबर तक लूट की 91 वारदातें हुईं जो प्रदेश में सर्वाधिक हैं। वहीं इंदौर में एक जनवरी से 22 नवंबर तक महिलाओं पर अत्याचार के 1893 मामले दर्ज हुए जो पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। यह जानकारी विधानसभा में विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित जवाब में गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने दी है। भोपाल में इस साल 1055 मामले चोरी के दर्ज हुए। राजधानी में महिलाओं पर अत्याचार के 1450 मामले दर्ज हुए। इसमें बलात्कार के 123 मामले हैं।


जिनके साथ वारदात हुई, उन्होंने उठाए व्यवस्था पर सवाल


सिर्र्फ आश्वासन नहीं रिजल्ट चाहिए
:पुलिस अपना काम किसी निजी एजेंसी को दे दे, शायद रिकवरी का औसत बढ़ जाए। मेरे घर बीते 31 मार्च को चोरी हुई थी। बदमाश करीब साढ़े आठ लाख रुपए का माल चुरा ले गए। नौ महीने होने को आए, जब भी गोविंदपुरा पुलिस से बात करते हैं तो सिर्फ आश्वासन मिलता है। ऐसी पुलिस के भरोसे आम आदमी क्या खुद को सुरक्षित महसूस कर सकता है?
- विजया रायकवार, रचना नगर


फास्ट ट्रैक कोर्ट में होना चाहिए  गंभीर मामलों की सुनवाई


हमारे देश का कानून बेहद लचीला है। इसे और सख्त करने की जरूरत है। बदमाश अपराध के बाद आसानी से चला जाता है और पुलिस को भनक तक नहीं लगती। मीरा आहूजा की हत्या करने वाले बदमाश का अब तक कोई सुराग नहीं लगा। ऐसे हर गंभीर मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होना चाहिए, ताकि बदमाशों को जल्द सजा हो सके।
- जीवन आहूजा (बिजली कंपनी के कैश काउंटर पर लूट के दौरान मारी गईं कैशियर मीरा आहूजा के देवर)


इन लुटेरों को फांसी क्यों नहीं दे देते


पाई-पाई जोड़कर किसी तरह सोने की एक चेन बनवाई थी, बीती 08 अक्टूबर की शाम बदमाश उसे ही लूट ले गए। आम जनता बदमाशों  से किस कदर परेशान है, पुलिस को इसका अहसास नहीं है। इन बदमाशों को तो फांसी दे देनी चाहिए।
- नाहिद, झदा कॉलोनी, जेल रोड


पुलिस की नाक के नीचे हो रही वारदातें


- 16 अगस्त 2012 : कमला नगर थाने के पास मकान से साढ़े तीन लाख रुपए का माल चुरा लिया।
- 10 सितंबर 2012 : बदमाश तलैया थाने से सटे काली मंदिर से हजारों का माल चुरा ले गए।
- 01 दिसंबर 2012 : कोहेफिजा थाने के पास मीरा आहूजा की हत्या कर दो लाख रुपए लूट लिए।
- 05 दिसंबर 2012 : नीलबड़ पुलिस चौकी से सटे दुर्गा मंदिर से करीब एक लाख का माल चोरी।
- 09 दिसंबर 2012 : लालघाटी पुलिस चौकी के सामने सिद्धिदात्री मंदिर से डेढ़ लाख रु का माल चोरी।
- 10 दिसंबर 2012 को निशातपुरा थाने के ठीक सामने दुकान से हजारों रुपए का माल चोरी।


विधायक कहते हैं...


पुलिस अफसरों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। गृहमंत्री को भी सभी महानगरों के अपराधों की समीक्षा खुद करनी चाहिए।
- ध्रुवनारायण सिंह, भोपाल मध्य


राजधानी में पुलिस वीआईपी ड्यूटी में ज्यादा व्यस्त रहती है। इसके अलावा पुलिस की इच्छाशक्तिभी कम है, जिसके चलते अपराध और अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है।
- बाबूलाल गौर, गोविंदपुरा


समाज को विचार करना पड़ेगा कि राजधानी में अपराध क्यों बढ़ रहे हैं? पुलिस को भी अपनी पूरी कार्यप्रणाली में विश्वास कायम करने के प्रयास करने चाहिए, ताकि अच्छे परिणाम मिलें।
- विश्वास सारंग, नरेला


भोपाल में पुलिस पर राजनीतिक दबाव ज्यादा रहता है। पहले यहां एक एसपी हुआ करता था, अब तीन एसपी हो गए हैं, फिर भी अपराधियों पर लगाम नहीं लग पा रही है।
- आरिफ अकील, भोपाल उत्तर


कड़ा कानून और कानून का कड़ाई से पालन जरूरी


संगठित अपराधों को रोकने के लिए निश्चित तौर पर कड़े कानून की जरूरत है। महाराष्ट्र में मकोका का प्रयोग सफल रहा है। मप्र सरकार भी चाहे तो संगठित अपराधों की रोकथाम के लिए ऐसा कोई कानून बना सकती है। अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कड़ा कानून होना बहुत जरूरी है। इससे भी ज्यादा जरूरी है कि कानून का उतनी ही कड़ाई से पालन करवाना। मप्र में लंबे अर्से से सुनने में आ रहा है कि कमिश्नर प्रणाली लागू हो रही है। पता नहीं क्यों देर हो रही है। जरूरत है कमिश्नर प्रणाली लागू करके अच्छे अफसरों को उसकी कमान देने की। इससे अपराधियों में खौफ रहेगा। देश के कई शहरों में कमिश्नर प्रणाली के सकारात्मक परिणाम आए हैं। मप्र को कमिश्नर प्रणाली की दिशा में आगे बढऩे की जरूरत है।
- प्रकाश सिंह,
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी
( असम  व उत्तरप्रदेश पुलिस के अलावा सीमा सुरक्षा बल की भी कमान संभाल चुके हैं)


- चोरी 853 वारदात : घर में घुसकर चोरी गए माल की कीमत 5 करोड़ 31 लाख 90 हजार रुपए
- हत्या 71 वारदात
- लूट 152 वारदात 

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