नेता पुत्र में चुनाव जीतने का माद्दा हो तो टिकट देने से परहेज नहीं : तोमर

भोपाल। दूसरी बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि हर व्यक्ति की काम करने की अलग स्टाइल होती है। मुझे प्रभात झा की नीयत पर कभी शंका नहीं हुई। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती प्रदेश में कब सक्रिय होंगी, यह निर्णय पार्टी करेगी, लेकिन तोमर के अनुसार अध्यक्ष के बाद संगठन मंत्री अरविंद मेनन को बदलने का कोई विचार नहीं है। ऐसा कह कर तोमर ने संकेत दे दिए कि संगठन में पदाधिकारियों की नियुक्ति से लेकर विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण तक शिवराज, मेनन और उनकी आपसी सहमति से होगा।
पेश है तोमर से बातचीत -
प्रश्न - विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। क्या चुनौतियां हैं?
तोमर : बिल्कुल, हम चुनावी वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है कि पार्टी के आंतरिक ढांचे में संवाद और संपर्क बनाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री की सक्रियता के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन आगे यह जिम्मेदारी संगठन की भी होगी।
- आपको नहीं लगता कि बिजली और सड़क के मुद्दे पर सरकार फेल हुई है?
- मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि प्रदेश की कुछ सड़कें खराब हैं, लेकिन अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री चिंतित भी हैं। आम आदमी को नहीं मालूम होता कि खराब सड़कें राज्य के अधीन हैं या केंद्र के। राज्य सरकार बेहतर सड़कें बना रही है। जहां तक बिजली का सवाल है तो वर्ष 2003 की तुलना में अब काफी सुधार हुआ है। फीडर सेपरेशन शुरू होने के बाद स्थितियां बदली हैं।
हां, जहां बिजली नहीं मिल रही है, उसकी वजह वहां अधोसंरचना ठीक नहीं होना है, लेकिन मुख्यमंत्री के वादे के मुताबिक चुनाव के पूर्व सभी को भरपूर बिजली मिलेगी।
- कांग्रेस की चुनौती को कितनी गंभीरता से लेते हैं?
- देखिए, कांग्रेस पुरानी पार्टी है। उसने प्रदेश में कई वर्षों तक शासन किया है। हमारी सीधी लड़ाई कांग्रेस से है, इसलिए उसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके दस वर्षों के शासनकाल में कोई काम नहीं हुआ, जिसे वे लोगों के सामने रख सकें। केंद्र की भी कोई उपलब्धि नहीं हैं, जिसे बताकर वोट बटोर सकें। फिर भी हम गंभीर हैं। सरकार ने जो विकास के काम किए हैं,उसका लाभ पार्टी को मिलेगा।
- आपकी सरकार और संगठन के लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। प्रदेश भर में किसान जमीन अधिग्रहण को लेकर चिंतित हैं। ऐसी स्थितियों से कैसे निपटेंगे ?
- भ्रष्टाचार के आरोप ही तो हैं, कुछ भी प्रामाणिक नहीं है। लोकतंत्र में आरोप- प्रत्यारोप लगाना स्वाभाविक है। जहां तक जमीन अधिग्रहण का मामला है तो प्रदेश सरकार ने किसानों को उचित मुआवजा दिया गया है। उद्योगपतियों से भी कहा गया है कि वे किसानों से बातचीत करके जमीन अधिग्रहण करें। सरकार जबरदस्ती किसी की जमीन छीनने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है।
-2008 और 2013 के चुनाव में परिस्थितियां कितनी भिन्न हैं?
उस समय शिवराज जी का अल्प कार्यकाल था और जितना कुछ हम करना चाह रहे थे, नहीं कर पाए। उस कार्यकाल में वे उमाजी और बाबूलाल गौर के बाद तीसरे मुख्यमंत्री थे। हमारे सामने कांग्रेस की चुनौती थी। जनशक्ति पार्टी भी अस्तित्व में आ चुकी थी, वह भी एक समस्या थी। लेकिन इस बार स्थिति भिन्न है। शिवराज जी की जनता के बीच जबरदस्त पकड़ बन गई है।
- प्रभात झा के कार्यकाल को कैसे देखते हैं?
- हर व्यक्ति की काम करने की अलग स्टाइल होती है। मुझे उनकी नीयत पर कभी शंका नहीं हुई, लेकिन इतने बड़े परिवार में काम के दौरान कभी-कभी मतभिन्नता हो जाती है। उनके कार्यकाल में ऐसी कुछ बातें हुई होंगी, जो मतभेद पैदा करती हैं, लेकिन उन्होंने इसे ठीक करने के प्रयास जरूर किए होंगे।
- झा ने कहा था कि पार्टी में उनकी विदाई को पोखरण विस्फोट की तरह गोपनीय रखा गया था, आपको थी जानकारी?
(पहले चुप्पी, फिर कहा) यह पार्टी का अंदरूनी मामला है। इस पर कुछ नहीं कहूंगा।
अध्यक्ष के बाद अब प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मेनन भी बदले जाएंगे?
संगठन मंत्री को अध्यक्ष के साथ बदला जाएगा, ऐसी कोई परंपरा नहीं है। अभी ऐसा कोई विचार भी पार्टी के सामने नहीं है।
- भाजपा में भी वंशवाद बढ़ रहा है। किस पैमाने पर टिकट दी जाएंगी?
- पार्टी कभी इसके पक्ष में नहीं रही है। यदि किसी बड़े नेता या पदाधिकारी का पुत्र कार्यकर्ता है और वह चुनाव जीतने का माद्दा रखता हो तो उसे टिकट देने में कोई परहेज नही है।
उमा भारती प्रदेश की राजनीति से दूर हैं। क्या उनका उपयोग प्रदेश के विधानसभा चुनाव में करेंगे?
इसका निर्णय पार्टी करेगी।








