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खतरनाक! ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की संख्या हुई दोगुनी

 
Source: रोहित श्रीवास्तव   |   Last Updated 03:51(10/02/12)
 
 
 
 
भोपाल। राजधानी में लंग (फेफड़े) कैंसर के मरीजों की संख्या छह साल में दोगुनी हो गई है। यही स्थिति महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की है। यह खुलासा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर)ने पापुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री 2006-08 की हालिया रिपोर्ट में किया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भोपाल में तंबाखू उत्पादों के उपयोग के बढ़ने के कारण लंग कैंसर के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। आईसीएमआर डायरेक्टर डॉ. वीएम कटोच ने बताया कि कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम में भोपाल के छह अस्पतालों को शामिल किया गया है, जहां वर्ष 2006-08 में लंग कैंसर के 245 नए मरीज मिले हैं। मरीजों की यह संख्या वर्ष 1999-2000 से 122 ज्यादा है। डॉ. कटोच बताते हैं कि भोपाल में पान, तंबाखू और गुटखा खाने वालों की अपेक्षा सिगरेट, बीड़ी पीने वालों की संख्या कम है। बावजूद इसके लंग कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसका कारण शहर में बढ़ता प्रदूषण है। लंग कैंसर के अलावा भोपाल में आहार नली, लेरेंग्स और बोन कैंसर के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।

भोपाल का देश में दसवां नंबर
कैंसर मरीजों की संख्या के मामले में भोपाल का स्थान देश में दसवां है। रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में कैंसर मरीजों की संख्या 3 हजार 977 है। जबकि, मुंबई में इस बीमारी के मरीजों की संख्या 33 हजार 2 सौ 30 है, जो देश में सर्वाधिक है। सर्वाधिक कैंसर के मरीजों वाले शहरों की सूची में दिल्ली दूसरे एवं चेन्नई तीसरे स्थान पर है।

15 में से एक कैंसर का मरीज!
राजधानी में 50 साल की आयु वर्ग के 15 स्वस्थ पुरुषों में से एक और 13 महिलाओं में से एक को कैंसर हो सकता है। यह आशंका आईसीएमआर ने कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की रिपोर्ट में जताई है। आईसीएमआर ने यह आशंका मरीजों और उनके परिजनों से जुटाई गई जानकारी के आधार पर
व्यक्त की है।

कम आयु वर्ग के लोग भी चपेट में
नवोदय कैंसर हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. श्याम अग्रवाल ने बताया कि पहले 50 साल अथवा उससे ज्यादा उम्र के लोगों में लंग कैंसर होता था, लेकिन कुछ सालों में 35 से 40 साल आयु वर्ग में भी लंग कैंसर के मरीज मिले हैं। यह कैंसर बीड़ी, सिगरेट आदि के पीने अथवा कार्बन मोनोआक्साइड जैसी गैसों से फेंफड़ों का संपर्क होने के कारण होता है।

जवाहर लाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल के रेडिएशन अंकोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आरके पांडे ने राजधानी में लंग कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह यह बताई कि 10 साल पहले बीड़ी, सिगरेट पीने और तंबाखू खाने वाले व्यक्ति स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराते थे। इस कारण लंग कैंसर के मरीजों की संख्या, मुंह के कैंसर के मरीजों के आंकड़े से कम थी। वर्तमान में मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या में आंशिक गिरावट दर्ज हुई है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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