मध्यप्रदेश के देवास नगर निगम की झांकी में ठंडे पानी से नहाते बच्चे को आखिरकार मीडियाकर्मियों ने चार दिन बाद सोमवार को खोज निकाला। बच्चे का नाम सन्नी है और वह फारुख नगर में रहता है। सन्नी गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह देखने गया था, तभी उसे झांकी में नल के नीचे बैठने का ऑफर मिला था। सोमवार को मीडियाकर्मी बच्चे को खोजते हुए फारूख नगर पहुंचे। यहां कुछ बच्चे खेल रहे थे जिन्हें अखबार में छपी तस्वीर दिखाई गई तो उन्होंने इशारा करते हुए कहा, बच्चा वहां है। वहां बच्चे ने अपना नाम सन्नी तथा पिता का नाम संतोष बताया।
समोसे खिलाए, पांच रुपए दिए : सन्नी ने बताया, 'मैं मामी के साथ परेड ग्राउंड पर गया था। मामी खिलौने बेच रही थी और मैं परेड देख रहा था। तभी एक टकले से गोरे अंकल ने मुझे अपने पास बुलाया। पहले समोसा खिलाया और फिर पांच रुपए देकर कहा तुझे झांकी में नल के नीचे बैठकर नहाना है। मैं नल के नीचे बैठ तो गया लेकिन मुझे पानी बहुत ठंडा लग रहा था। बाद में एक अंकल के कहने पर उन्होंने मुझे शॉल ओढ़ाई।'
इधर, झांकी निर्माता बाबूलाल मंडलोई और परियोजना अधिकारी आशुतोष कानूनगो ने कारण बताओ नोटिस जवाब दे दिया है। कानूनगो ने सफाई में कहा है कि झांकी शिप्रा जलावर्धन योजना की थीम पर बनी थी। निरीक्षण के दौरान नल के नीचे दो मटके रखे थे। झांकी निर्माता ने बगैर राय-मशविरे के बच्चे को झांकी में शामिल कर लिया।
झांकी निर्माता मंडलोई ने स्पष्टीकरण दिया है कि उसने खिलौने बेचने वाले बच्चे को बैठाया था। उसके परिजन वहीं थे लेकिन वह कौन है, कहां का रहने वाला है पता नहीं। प्रशासन को मीडियाकर्मियों ने सूचना दी लेकिन घंटों तक कोई अफसर बच्चे के पास नहीं पहुंचा। देर रात एसडीएम प्रभात काबरा, जिला अस्पताल डॉ. सुभांशु डगांवकर को लेकर सनी के घर पहुंचे।