'साम्यवाद व पूंजीवाद फेल, अब सहकारिता से उम्मीद'
Source: Dainik Bhaskar News | Last Updated 05:11(10/02/12)
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सहकारिता सृष्टि का मूल है और भारतीय संस्कारों में है। भारतीय संस्कृति में सभी के कल्याण की जो बात होती है, वह सहकारिता ही है। सहकार के बिना दुनिया चल नहीं सकती। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि पूंजीवाद और साम्यवाद के असफल होने के बाद अब दुनिया सहकारिता की तरफ देख रही है।
दोनों नेता गुरुवार को विधानसभा सभागार में सहकार भारती द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। चौहान ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में सहकारिता का दर्शन शामिल है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्राणायाम जरूरी है। उसी तरह समाज को स्वस्थ रखने के लिए अर्थायाम जरूरी है।अर्थायाम से मतलब उत्पादन, वितरण और उपभोग में सामंजस्य बनाने और गलत रास्तों से अर्थ का उपार्जन न करने से है। सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश मराठे ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। अपेक्स बैंक के चेयरमेन भंवर सिंह शेखावत ने भी संबोधित किया। दो दिन के इस सम्मेलन में 18 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
बिसेन साहब को जूते नहीं उतारना पड़े
कार्यक्रम का शुभारंभ रिमोट कंट्रोल के जरिए दीप प्रज्ज्वलन और ध्वजारोहण से हुआ। मुख्यमंत्री ने इसे सहकारिता में नई तकनीक के प्रवेश का उदाहरण कहा। फिर बोले कि परंपरा और तकनीक के इस समावेश से दीप प्रज्ज्वलन करने के लिए जूते भी नहीं उतारना पड़े। इससे हमारे बिसेन साहब बहुत खुश होंगे। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी से मंच पर बैठे बिसेन भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।