कोर्ट केस पर 1 करोड़ खर्च, नतीजा शून्य
Source: अभिषेक दुबे. | Last Updated 03:11(05/02/12)
भोपाल. कुछ समय से मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) एकेडमिक गतिविधियों से कहीं ज्यादा अदालती मामलों को लेकर सुर्खियों में है। यही वजह है कि मैनिट प्रशासन ने महज ढाई साल में अदालती लड़ाई में एक करोड़ रुपए खर्च कर दिए। खास बात यह है कि किसी भी केस में संस्थान को सफलता नहीं मिली है।
वर्ष 2009 से लेकर नवंबर 2011 तक मैनिट में करीब 85 लाख रुपए वकीलों को फीस के तौर पर दिए गए और 15 लाख रुपए यात्रा भत्ता सहित अन्य पर खर्च किए गए। इन प्रकरणों की फाइल पर जब डायरेक्टर अप्पू कुट्टन की नजर पड़ी तो वे भी इतनी संख्या में केस और इन पर खर्च राशि को लेकर हैरत में पड़ गए। इसी के बाद अनावश्यक केस वापस लेने की बात कही जा रही है। कुछ केस तो ऐसे हैं जिन्हें दायर करने को लेकर ही अब सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2005 में हुई प्रोफेसरों, लाइब्रेरियन और ट्रेनिंग प्लेसमेंट ऑफिसर की भर्ती के मामले में सीबीआई से क्लीन चिट मिलने के बावजूद हाईकोर्ट में 59 कैविएट लगाई गईं। सूत्रों के मुताबिक कानूनी लड़ाई को लेकर राशि को खर्च करने के पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वित्त शाखा से अनुमति भी नहीं ली गई। आरोप है कि पूर्व में चेयरमैन रहे एएन सिंह पर उनके द्वारा किए व्यक्तिगत केस का खर्चा भी संस्थान ने वहन किया है। रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 13 लाख रुपए तो ऐसे अधिवक्ताओं को दे दिए गए, जिसकी आधिकारिक जानकारी प्रशासन के पास भी नहीं है।