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...उनकी किस्मत में तो राज करना लिखा था
Dainik Bhaskar News | Apr 28, 2012, 04:39AM IST

कचरे के ढेर में फेंके जाने से आशुतोष को संक्रमण हो गया था। तलैया पुलिस ने उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां से स्वस्थ होने के बाद उसे मातृछाया पहुंचाया गया। यहां नीलकंठ पांचखेड़े और उनकी पत्नी सुधा पांचखेड़े का उसे दुलार मिला। मातृछाया पहुंचने के पांच माह बाद सूरत के कपड़ा और तेल व्यवसायी हरीश जैन (परिवर्तित नाम) ने आशुतोष को गोद ले लिया। उन्होंने कोर्ट में ही अपनी दोनों फैक्ट्रियां आशुतोष के नाम कर दीं। आशुतोष इस समय ढाई वर्ष का है।
नई कार से गई रिमझिम
एक महिला उसे मातृछाया परिसर में छोड़ गई थी। रात करीब दो बजे बच्चों की देखभाल करने वाली यशोदा मां ने उसके रोने की आवाज सुनी। मातृछाया के कर्मचारियों ने उसे ढूंढा तो दीवार के किनारे एक बच्ची रोती हुई मिली। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। नाम रखा गया रिमझिम। मातृछाया आए बेंगलुरु के जयराम अय्यर (परिवर्तित नाम) दंपती ने जब उसे देखा तो उन्होंने उसे गोद लेने की इच्छा जाहिर की। इसके बाद एक्सपोर्ट व्यवसायी जयराम नई कार लेकर रिमझिम को गोद लेने मातृछाया पहुंचे। उन्होंने रिमझिम के नाम पर अपना पूरा बिजनेस कर दिया है।
इन्हें मिलेगा मां का आंचल?
मां ने बीमारी का पता चलते ही उसे अस्पताल में छोड़ दिया। कई दिनों तक उसने जिंदगी और मौत से संघर्ष किया। अंतत: उसे (समीक्षा) को नई जिंदगी मिल गई। वह मातृछाया में पल रही है, लेकिन उसे भी मां के आंचल की दरकार है। उसे थैलेसीमिया है।
क्या मुझे मां नहीं मिलेगी: चार वर्षीय कविता को लेकर मातृछाया प्रबंधन भी चिंतित है। प्रबंधन का कहना है कि गोद लेने के इच्छुक दंपती सबसे कम उम्र का बच्चा चाहते हैं। यही वजह है कि यहां आने वाले दंपती कविता से कन्नी काट रहे हैं। उन्होंने बताया कि कविता ही नहीं परी, कावेरी, पूनम को भी कोई गोद लेने का इच्छुक नहीं है।





