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मेरी बेटी राजनीति में सक्रिय है, चुनाव लड़ना उसका अधिकार बनता है : राघवजी

मनीष दीक्षित | Jan 06, 2013, 02:28AM IST
मेरी बेटी राजनीति में सक्रिय है, चुनाव लड़ना उसका अधिकार बनता है : राघवजी
भोपाल.  वित्त मंत्री राघवजी का कहना है कि अब चुनाव लड़ने की मेरी कोई इच्छा नहीं है। मेरी बेटी (ज्योति शाह) राजनीति में सक्रिय है। इसलिए चुनाव लड़ना उसका अधिकार बनता है। लेकिन मैं उसे टिकट दिलाने का कोई प्रयास नहीं कर रहा हूं।
 
राघवजी के इस बयान से माना जा सकता है कि इस साल उनका वित्त मंत्री के तौर पर आखिरी बजट होगा। उन्होंने कहा है कि महंगाई की मार झेल रही प्रदेश की जनता पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया जाएगा। हालांकि इस चुनावी वर्ष में  उन्होंने पेट्रोलियम पदार्थो पर लगने वाले वेट को कम करने के संकेत दिए हैं।
 
प्रश्न - प्रदेश की वित्तीय स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
राघवजी : देखिए, अब तो सरकार के कार्यकाल का एक वर्ष बचा है और यह चुनावी वर्ष है। इसलिए इस बार का बजट कुछ पिछले सालों से हट कर रहेगा, क्योंकि चुनावी वर्ष में हम कोई नया टैक्स नहीं लगा सकते और इसके विपरीत सुविधाएं भी देनी हैं। विकास योजनाओं को आगे बढ़ाना बड़ी चुनौती है।
 
मतलब, प्रदेश की जनता को कुछ सौगातें मिलने की संभावनाएं हैं?
चुनावी बजट है। जो हो सकता है, वह किया जाएगा।
 
क्या राज्य सरकार पेट्रोलियम पदार्थो पर लगने वाले वेट को कम करेगी?
प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को ध्यान में रखकर इस पर विचार जरूर किया जा सकता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मध्य प्रदेश में वेट अन्य राज्यों से अधिक लगता है, जैसा प्रचारित किया जा रहा है।
 
कैग की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वित्त विभाग के निर्देशों के बावजूद कई विभाग निजी बैंकों में पैसा रखते हैं।
 
इस पर कोई कार्रवाई करेंगे?
ऐसे मामलों में संबंधित विभाग को कार्रवाई करनी होती है। हम उन विभागों को कार्रवाई करने के लिए जरूर लिखते हैं।
 
कई विभाग बजट का उपयोग नहीं कर पाते हैं। बावजूद इसके अनुपूरक बजट में भी पैसा मांगते हैं, लेकिन राशि खर्च नहीं कर पाते हैं?
बजट का उपयोग नहीं होने पर विभाग राशि सरेंडर कर देते हैं। यह राशि जरूरत के हिसाब से अन्य विभाग को आवंटित कर दी जाती है। कई बार केंद्र सरकार से राशि देर से मिलने या टेंडर नहीं हो पाने के कारण राशि समय पर खर्च नहीं हो पाती है। लेकिन यह स्थिति अधिक नहीं होना चाहिए।
 
क्या आप अगला चुनाव लड़ेंगे?
अब चुनाव लड़ने की मेरी कोई इच्छा नहीं है। मैं अपनी तरफ से कोई प्रयास भी नहीं करूंगा। लेकिन पार्टी का आदेश सवरेपरि है।
 
पार्टी में चर्चा है कि आप राजनीतिक विरासत अपनी बेटी ज्योति शाह को सौंपने वाले हैं?
मैं उसके लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा हूं। वह स्वयं की उपयोगिता साबित करेगी तो मुझे लगता है कि पार्टी उसके नाम पर विचार करेगी। चूंकि वह राजनीति में सक्रिय है, इसलिए उसका अधिकार बनता है, लेकिन मैरे कारण नहीं, बल्कि स्वयं के परफारमेंस के कारण।
 
स्वर्गीय अजय नारायण मुशरान के बाद आप प्रदेश के दूसरे वित्त मंत्री होंगे जो लगातार दसवां बजट पेश करेंगे। आपके हिसाब से आपकी पार्टी में कौन ऐसा नेता है, जो इस भूमिका का निर्वहन कर पाएगा?
इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
आपकी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने 62 वर्ष में राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है। आपकी उम्र भी काफी हो गई है।
 
इस पर कुछ कहेंगे?
यह उनका व्यक्तिगत अभिमत है। नानाजी देशमुख ने भी ऐसा किया था। उन्होंने तो केन्द्रीय मंत्री बनने का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया था।
 
क्या आपकी सहमति के बिना तोरण सिंह दांगी को विदिशा जिले में पार्टी अध्यक्ष बनाया गया?
दांगी के लिए मेरी सहमति ली गई थी।
 
जीएसटी के मुद्दे पर आपने राज्यों को एकजुट किया। जिसके चलते केंद्र सरकार जीएसटी नहीं ला सकी। केंद्र के इस प्रस्ताव में क्या खामियां है? 
देखिए,पहली बात तो यह है कि विक्रय पर कर लगाने का अधिकार संविधान में राज्यों को दिया गया है। यही एक मात्र टैक्स का स्त्रोत राज्यों के पास है। इसमें भी केंद्र हस्तक्षेप कर रहा है। यह अनुचित है।
 
क्या सीएसटी की प्रतिपूर्ति के मामले में भी केंद्र ने राज्यों को धोखा दिया है? 
घाटे को पूरा करने के लिए कुछ सेवाएं राज्यों को सौंपने का वादा केंद्र ने दो वर्ष पहले किया था। लेकिन अभी तक इस
 
दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में जीएसटी के मामले में केंद्र सरकार पर कैसे भरोसा करें?
 
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