गैस कनेक्शन की गलत जानकारी दी तो केस, जा सकते हैं जेल

भोपाल। दूसरा गैस कनेक्शन बचाने के लिए गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। दरअसल, सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या सीमित होने से एक से ज्यादा गैस कनेक्शन के दायरे में आ रहे उपभोक्ताओं ने अपने कनेक्शन बचाने के लिए बड़े पैमाने पर गलत शपथ पत्र दिए हैं। इसी के चलते केंद्र सरकार ने सीधे तेल कंपनियों को ही इस तरह के उपभोक्ताओं पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मप्र में करीब 15 लाख एलपीजी कनेक्शनधारक एक से ज्यादा कनेक्शन के दायरे में आ रहे थे। इन सभी के गैस कनेक्शन ब्लॉक करने के बाद इन्हें नो योर कस्टमर (केवाईसी) फार्म भरने को कहा गया था। अब तक करीब 12 लाख से अधिक लोग केवाईसी भर चुके हैं। फार्म भरने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर है। अनुमान है कि इस तारीख तक शेष 3 लाख ग्राहक भी केवाईसी फार्म भर देंगे।
एक से ज्यादा कनेक्शन के दायरे में आ रहे अधिकांश लोगों ने अपने कनेक्शन को बचाने के लिए एक ही कनेक्शन होने का शपथ पत्र दिया। इसके समर्थन में फर्जी किरायानामा और घर का बंटवारा होने जैसे दस्तावेज संलग्न किए हैं। एलपीजी डीलर के कर्मचारी जब दस्तावेजों के आधार पर सर्च करने घर पहुंचे तो कई जगह अलग तस्वीर सामने आई। एलपीजी डीलर्स कहते हैं करीब 96 फीसदी से अधिक लोगों ने एक से ज्यादा कनेक्शन को बचाने की कोशिश की। महज 3-4 फीसदी लोगों ने ही माना कि उनके पास एक से ज्यादा कनेक्शन हैं और अतिरिक्त कनेक्शन को सरेंडर किया।
अब यह होगा
पेट्रोलियम कंपनियां आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 व 7 के तहत ग्राहक के खिलाफ स्वयं कार्रवाई करेंगी। दोषी पाए जाने पर अधिकतम सात वर्ष की सजा का प्रावधान है।
यह है व्यवस्था
जिला प्रशासन का खाद्य विभाग इस अधिनियम के तहत कार्रवाई करता है। लेकिन यह स्पॉट पर हो रहे घरेलू सिलेंडर का दुरुपयोग और डीलर्स द्वारा की जाने वाली कालाबाजारी तक ही सीमित है।
सरकार चाहती है सब्सिडी का दुरुपयोग कर रहे लोगों के खिलाफ खुद तेल कंपनियां ही कार्रवाई करें। इस आशय का नोटिफिकेशन आ चुका है। सभी डीलर्स को इसकी जानकारी दे दी गई है। उनकी सर्च रिपोर्ट के आधार पर ही गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई होगी।
- पीसी काटकर, एरिया मैनेजर (एलपीजी), इंडेन गैस (मप्र)






