भोपाल। किसी मरीज की मौत के बाद उसके डेथ सर्टिफिकेट पर बीमारी आदि की पूरी जानकारी के बाद डॉक्टर साइन करते हैं, लेकिन टीबी अस्पताल के डॉ. एन. सिंह को घर जाने की इतनी जल्दी रहती है कि वे खाली डेथ सर्टिफिकेट पर ही अपने साइन कर जाते हैं। डॉक्टर साहब सिर्फ इसी मामले में उदार नहीं हैं, बल्कि मरीजों को एडमिट करने से लेकर उनके इलाज तक की व्यवस्था एडवांस में कर जाते हैं।
राज्य के सबसे बड़े टीबी अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. एन. सिंह विदिशा में रहते हैं। उन्हें रोजाना विदिशा से भोपाल अप-डाउन करना होता है। शाम ढलने से पहले घर पहुंच जाएं, इसके लिए डॉक्टर साहब ने अनूठी इलाज पद्धति विकसित कर ली है। वे टीबी जैसी गंभीर बीमारी के मरीज को देखे बिना उसका इलाज पर्चे पर उतार देते हैं।
अपने जूनियर्स को मौखिक और लिखित में निर्देशित भी करते हैं कि मेरी अनुपस्थिति में यदि कोई मरीज आता है, किसी का अस्पताल में निधन होता है, किसी को इलाज की जरूरत हो तो बिना मरीज को देखे लिखे गए पर्चों के अनुसार काम कर लें।
आखिर ऐसा कैसे कर पाते हैं ये डॉक्टर साहब, क्या है इनकी आनोखी कार्य प्रणाली, काम करने का कैसा है स्टाइल, इसके बावजूद भी इतने सफल क्यों हैं ये जनाब, यह सबकुछ आगे की तस्वीरों के जरिए जानिए...