इस शख्स ने किया वो कारनामा जिसकी कल्पना करना मुश्किल है

रतलाम। सिक्कों की किल्लत का लाभ उठाने के लिए व्यापारियों ने खुद के सिक्के ढलवा लिए। कानून से बचने के लिए इन्हें लॉकेट का रूप दिया। इन पर पांच का अंक लिखा है जिसे पांच रुपए कीमत में चलाया जा रहा है। एक और दो रुपए के सिक्कों की जगह दुकानदार पाउच व टॉफियां दे रहे हैं। चाय और दूध की दुकानों पर इनका चलन ज्यादा है।
माणकचौक पुलिस ने मंगलवार को दीनदयालनगर निवासी मनोज पिता देवीलाल यादव की रिपोर्ट पर भरावा की कुई क्षेत्र में चाय दुकान चलाने वाले भंवरलाल पिता रतनलाल जैन के खिलाफ ऐसे ही नकली सिक्के रखने, उपयोग करने तथा धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया।
16 जब्त, बाकी कुएं में
एसपी डॉ. रमनसिंह सिकरवार के निर्देश पर माणकचौक थाना प्रभारी आर.पी. रावत ने आरोपी की दुकान से 16 सिक्के जब्त किए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार्रवाई के बाद शेष सिक्के आरोपी दुकानदार ने कसारा बाजार स्थित कुएं में फिंकवा दिए।
पहले ये विकल्प था
90 के दशक में भी बाजार में सिक्कों तथा एक, दो तथा पांच के नोट की भारी किल्लत हुई थी। व्यापारियों ने तब विकल्प के तौर पर उतनी ही कीमत के डाक टिकट पॉलीथिन में पैक कर मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किए थे। इसी तरह कटे-फटे नोट भी पॉलीथिन में पैक कर एक साल तक चलाए गए थे।
टोकन के रूप में मर्जी की मुद्रा
नकली सिक्के और टोकन के रूप में मर्जी की मुद्रा का चलन तब हो रहा है जबकि राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों द्वारा शहर में काफी मात्रा में सिक्के बांटे गए हैं। जानकारी के अनुसार स्टेट बैंक की तीन शाखाओं तथा आईसीआईसीआई बैंक की एक शाखा से ही इस साल अब तक करीब 20 लाख रुपए के सिक्के बांटे जा चुके हैं। बावजूद शहर के व्यापारी कृत्रिम किल्लत बताकर अवैध मुद्रा का उपयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं।
इसलिए अपराध
कानून के जानकारों के मुताबिक व्यापार के लिए वस्तु विनिमय अथवा नोट या सिक्कों का प्रचलन है। नोट व सिक्के प्रक्रिया के अधीन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जारी करता है जिन पर राजमुद्रा (अशोक चिह्न्) अंकित होती है। कई व्यावसायिक संस्थान कैश काउंटर पर रुपए जमा कर खरीदी के लिए टोकन देते हैं। इस टोकन का उपयोग उस संस्थान के भीतर ही हो सकता है। मंगलवार को पकड़ा गया भंवरलाल सीधे लेनदेन में मुद्रा के रूप में टोकन का प्रयोग कर रहा था जो भारतीय मुद्रा अधिनियम 1906 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
व्यापारी को दोहरा लाभ
बर्तन व्यापारियों के मुताबिक सिक्के ढालने की डाई बनवाने की कीमत अलग कर लें तो पांच रुपए मूल्य के इस तरह के सिक्कों की लागत करीब सवा या डेढ़ रुपए आती है। डाई दिल्ली में आसानी से उपलब्ध है। इससे पीतल या स्टील मेटल शीट खरीदकर सिक्के ढाल लिए जाते हैं। स्टील शीट की कीमत 260 रुपए प्रति किलो है। इसमें 400 सिक्के बड़े आराम से बन सकते हैं। इसी तरह पीतल की नई शीट 500 व पुरानी 350 रुपए प्रति किलो के भाव पर मिलती है।
पीतल की एक किलो शीट से करीब 500 तक सिक्के आसानी से ढाले जा सकते हैं। चूंकि जिस दुकान का सिक्का है इसलिए उसी दुकान में मान्य होगा। इसलिए ग्राहक को मजबूरन ऐसा सिक्का चलाने के लिए फिर से उसी दुकान पर आना पड़ता है जिससे व्यापारी को दोहरा लाभ होता है।
धाराएं और सजा का प्रावधान
धारा-----आरोप-----------------सजा
253--नकली सिक्के कब्जे में रखना-----5 साल कैद
254--नकली सिक्कों का उपयोग करना----2 साल कैद
420-----धोखाधड़ी-------------7 साल कैद





