हुमायू के शक्तिशाली सामंत शेरशाह सूरी ने 1537 में बिहार और 1538 में बंगाल में अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली। इसके बाद शेरशाह सूरी ने 1539 में हुमायू को चौसा की लड़ाई में हराकर देश से भागने के लिए मजबूर कर दिया था। उसने दिल्ली में 1540 से 1545 तक ही राज्य कर सका क्योंकि बुंदेलखंड जीतने की उसकी चाहत ही उसकी मौत का सबब बन गई थी और एक किले की दीवार ने यह उसका सपना ही नहीं उसकी जान भी ले ली।