हाईकोर्ट ने पूछा ‘हज हाउस बने या मरीजों के लिए रेस्ट हाउस?’
भोपाल. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि भोपाल के ईदगाह हिल्स में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आरक्षित जमीन पर धर्मशाला या हज हाउस बनना चाहिए या फिर मरीजों के लिये रेस्ट हाउस? एक्टिंग चीफ जस्टिस सुशील हरकौली और जस्टिस आलोक अराधे की युगलपीठ ने वर्तमान सरकार को विवादित जमीन नगर निगम को आवंटित करने पर भी जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
युगलपीठ ने यह सवाल नगर विकास मंच, ईश्वर दास ग्रोवर, राकेश सोनपार और बल्लूमल चांदनानी की ओर से वर्ष 2001 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद किया। तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने ईदगाह हिल्स की जमीन हज हाउस निर्माण के लिये अप्रैल 2001 में आवंटित की थी। आवेदकों का कहना है कि उक्त जमीन मास्टर प्लान में स्वास्थ्य सेवाओं के लिये आरक्षित थी। याचिका के अनुसार ईदगाह हिल्स पर टीबी और कैंसर अस्पताल है, जहां के मरीज विवादित जमीन से आने वाली खुली हवाओं का लाभ लेते हैं। आवेदकों ने उक्त जमीन पर हज हाउस के निर्माण को पूरी तरह अनुपयुक्त बताते हुए उस पर पुनर्विचार करने की प्रार्थना तत्कालीन सीएम से की थी। उस पर कोई कार्रवाई न होने पर यह जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी।







