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आईएएस बनना चाहते हैं तो ये हैं एक्जाम क्लियर करने के फंडे

Dainik Bhaskar News | Aug 05, 2012, 00:03AM IST
 
 


भोपाल। आईएएस बनने का एक विचार, कड़ी मेहनत करने का जज्बा, सालों का संघर्ष, लोगों की प्रश्न पूछती निगाहें कि.. ‘भाई इस बार क्या होगा?’ इस सबका पूरे दृढ़ निश्चय से जो सामना करता है वह होता है आईएएस की तैयारी करने वाला स्टूडेंट। लेकिन जब एक बार आईएएस की लिस्ट में उसका नाम आता है तो उस गोल्डन मूमेंट के बाद उसकी दुनिया बदल चुकी होती है। यहां तक कि लोगों की निगाहें भी।

सरोजनी नायडू शासकीय (स्वशासी) कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में ग्रेजुएट्स प्रोबेशनरी आईएएस ऑफिसर्स से रूबरू हुए। छोटे-बड़े, गांव-शहरों से निकलकर देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में अपना स्थान सुरक्षित करने वाले मप्र काडर के आधा दर्जन आईएएस ने अपने अनुभव स्टूडेंट्स के साथ एक सीनियर के तौर पर बांटे।

कॉलेज के करियर गाइडेंस सेल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में इंदौर की रुचिका दिवाकर ने बताया कि मैंने इंदौर से इंजीनियरिंग करने के बाद नोएडा में कुछ समय जॉब किया। तभी मुझे लगा कि मुझे आईएएस की तैयारी करना चाहिए। अपने प्रदेश में देखा तो बहुत अच्छी कोचिंग क्लासेस नहीं थी इसलिए तैयारी करने दिल्ली गई। तीसरे साल में आईआरएस निकाला फिर लगा कि एक आखिरी चांस और लेना चाहिए। बस लास्ट अटेंप्ट में अपना टारगेट पूरा कर लिया। पढ़ाई की बात करें तो हमेशा अपनी एजुकेशन पर पूरा ध्यान दें।

कुछ दिनों के लिए सब छोड़ दें। हम भी जब इस एज में थे तो हमें भी दोस्तों के साथ घूमने का मन होता था लेकिन जब सपने पूरे होते हैं तो उसका मजा उस घूमने से कहीं ज्यादा होता है। स्पोर्ट्स, मूवी के लिए टाइम दें लेकिन अपने टारगेट को हमेशा याद रखें। जो काम करें दिल से करें। इस मौके पर प्रदेश सरकार के सीनियर आईएएस अफसर और नूतन कॉलेज स्टॉफ भी मौजूद रहा।

हम आपसे अलग नहीं हैं और न ही हम ऊपर से टपके हैं..

हम आपसे अलग नहीं है, न तो ऊपर से टपके हैं। बस हमने आईएएस बनने की ठान ली थी कि चाहे जो हो एक्जाम क्लियर करना ही है। यह बात कही प्रोबेशनरी आईएएस ऑफिसर वीएस चौधरी ने। इंग्लिश लैंग्वेज पर ग्रिप न होने को हर्डल मानने वाले स्टूडेंट्स से उन्होंने कहा कि मैंने खाना खाते, ब्रश करते हुए भी अंग्रेजी के शब्द याद किए। हर समय ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी मेरी पॉकेट में होती थी। रोज 10 शब्द मैंने याद किए। यहां तक कि रोड पर लगे सारे होर्डिग पढ़ता था जैसे ही कोई नया शब्द देखता तुरंत डिक्शनरी कंसल्ट करता और याद कर लेता। हां, इस सब के बीच खुद को फिट रखना बहुत जरूरी है। टाइम की कमी का बहाना कर इसे इग्नोर न करें। योग, एक्सरसाइज के जरिए फिट रहें।

ध्यान में रखें कुछ जरूरी पॉइंट्स

- पढ़ाई के घंटों में कंसिसटेंसी रखें। एक दिन 14 घंटे और दूसरे दिन 2 घंटे पढ़ने की बजाय रोजाना 10 घंटे ही पढ़ें।

- पढ़ाई ग्रुप में करें। डाउट्स भी जल्दी क्लियर होंगे और पढ़ने में मजा भी आएगा। हर दिन के लिए टास्क बनाएं और उसे पूरा करें।

- लैंग्वेज पर कमांड बनाने रीड, राइट, लिसन, स्पीक और डिस्कशन के 5 स्टेप फॉलो करें। स्टेप मिस करके लैंग्वेज नहीं सीख सकेंगे।

- आईएएस बड़ा कैनवास है, उसे किसी भी क्षेत्र में भेजा जा सकता है। जनरल अवेयरनेस से जुड़े हर टॉपिक को गहराई से पढ़ें।

- सब्जेक्ट का बेस क्लियर करने के लिए एनसीईआरटी की किताबें पढ़ें। हमेशा टारगेट पर फोकस रखें।

 
 
 

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