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ये मिल्क पार्लर है या किराना स्टोर, जरा देखिए और बताइए
Dainik Bhaskar News | Jul 21, 2012, 05:42AM IST

भोपाल दुग्ध संघ प्रबंधन और नगर निगम प्रशासन के बीच तालमेल के अभाव से भी ऐसे कई पार्लर चल रहे हैं। भोपाल दुग्ध संघ प्रबंधन का कहना है कि निगम प्रशासन ने पांच साल से शहर में कहीं भी पार्लर के लिए अनुमति तक नहीं दी। संघ प्रबंधन का यह भी कहना है कि भेल प्रशासन, बीडीए, हाउसिंग बोर्ड से तो अनुमति मिल रही है। ऐसी स्थिति में व्यावहारिक समस्याएं भी आ रही हैं।
ऐसा इसलिए हुआ: ज्यादातर पार्लर संचालकों का तर्क है कि भोपाल दुग्ध संघ के प्रोडक्ट में ज्यादा मार्जिन नहीं है। पार्लर संचालक मोहन सिंह यादव कहते हैं कि बिजली खपत के एवज में दो हजार रुपए महीने भुगतना पड़ता है। इसीलिए किराना या अन्य दूसरी वस्तुएं बेचना मजबूरी है।
अब कॉफी, चॉकलेट, चिप्स भी मिलेंगे: मिल्क पार्लरों पर अब जल्द ही कॉफी, चॉकलेट, ब्रेड, आलू चिप्स समेत ऐसी ही वस्तुएं मिला करेंगी। इसके लिए एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन(एमपीसीडीएफ) मप्र ,कर्नाटक और महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्रों के कारखानों से करार करेगा। फेडरेशन का दावा है कि यह सब कवायद उपभोक्ताओं की सुविधा और पार्लर संचालकों के हित में की जा रही है।
पार्लरों पर च्यवनप्राश, शहद जैसे उत्पादों की बिक्री के लिए हाल ही में भोपाल दुग्ध संघ ने मप्र लघु वनोपज संघ से करार किया है। एमपीसीडीएफ, पार्लरों पर बिक्री के लिए कर्नाटक के कैम्पको सहकारी कारखाने से कॉफी और चॉकलेट वगैरह बुलवाएगा। एमपीसीडीएफ से करार के लिए कैम्पको के चेयरमेन कनकोइ पद्मनाभ छह अफसरों के साथ 27 जुलाई को भोपाल आ रहे हैं।
यहां बंद हो गए पार्लर: मंत्रालय, पुरानी जेल रोड के पास, जनगणना भवन के पास, कोलार रोड।
ये हैं दुग्ध संघ के नियम
- ऐसी शिकायत मिलती है तो चेतावनी दी जाती है
- चेतावनी के बाद प्रबंधन सप्लाई बंद कर देता है
- जुर्माने या अर्थदंड का प्रावधान नहीं है






