...तो इंटरनेट पर खुद की पहचान छिपाने से बढ़ रहा अपराध!

भोपाल। केंद्रीय टेलीकॉम एवं आईटी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि 'हमारे देश में इंटरनेट पर पहचान छिपाकर बात कहने का चलन है। लोग किसी लड़की को ये मैसेज तो करते हैं कि आप बहुत सुंदर लग रही हैं, लेकिन खुद के बारे में नहीं बताते। यही क्राइम है। अगर लोग अपनी पहचान छिपाना बंद कर दें तो फिर किसी कानून की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।Ó सिब्बल रविवार को दैनिक भास्कर दफ्तर में वरिष्ठ संपादकों से बातचीत कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
मुंबई के पास पालघर की लड़कियों की गिरफ्तारी को उन्होंने कानून की खामी के बजाय कानून की समझ न होने का परिणाम बताया। सिब्बल के मुताबिक जिस सब इंस्पेक्टर ने इन लड़कियों की गिरफ्तारी की थी, उसे कानून की समझ नहीं थी। पुलिस ने कानून का गलत इस्तेमाल किया। इसलिए कार्रवाई भी हुई।
एक सवाल पर सिब्बल ने स्वीकार किया कि 'आईटी एक्ट इतना जटिल है कि मैं खुद उसे पूरी तरह समझने का दावा नहीं कर सकता। जबकि उसका पहला प्रयोग तो कोई दरोगा ही करता है।' लेकिन जब उनसे पूछा गया कि आखिर कब तक इस तरह की गलतियां होती रहेंगी, तो उनका जवाब था कि 'हम अभी संक्रमण के दौर में हैं। वक्त तो लगेगा। इसलिए सरकार ने आईटी एक्ट में कार्रवाई से पहले आईजी और डीसीपी रैंक के अधिकारियों की मंजूरी को अनिवार्य कर दिया है।'
सिब्बल को जब मोबाइल फोन को क्रेडिट कार्ड के रूप में उपयोग लाने के उनके वादे की याद दिलाई गई तो उन्होंने कहा कि 'मैं अपने वादे पर अटल हूं। यह सौगात देश को तय समय पर दे दी जाएगी। अगले छह महीने में लोग अपने मोबाइल को क्रेडिट कार्ड के रूप में उपयोग करने लगेंगे।
सवालों पर यह भी कहा
- हम जो नीतियां बनाते हैं, वे जनता की भलाई के लिए होती हैं। कैग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को भी इसे समझना चाहिए।
- नीतिगत मसलों पर फैसला सरकार पर ही छोडऩा बेहतर है। सुप्रीम कोर्ट भी यह कह चुका है।
- लोकल और एसटीडी के बीच दर का अंतर इस साल के अंत तक समाप्त हो जाएगा।
- 2जी की तरह कोल ब्लॉक आवंटन में 1.86 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की बात भी काल्पनिक साबित होगी।
- टेलीकॉम कंपनियां 37 फीसदी ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुकी हैं।
- वोटरों का परिचय पत्र के रूप में सरकार के पास डाटा है। आधार कार्ड के जरिए 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों को कवर कर रहे हैं। इसके बाद तमाम डाटा एक साथ कर दिया जाएगा।
कविताएं भी लिखते हैं सिब्बल
करीब डेढ़ घंटे चले सवाल-जवाब के दौर को सिब्बल ने अपनी एक कविता सुना कर खत्म किया। कविता की चार पंक्तियां हैं...
इस दौड़ में कोई जीते या हारे, ये दौड़ ऐसी जहां जीते न कोई
कोई आगे या पीछे खड़ा, सभी जानते हैं कि अंत है वहीं
जो महलों में सोया, दौलत में खोया, होश आएगा जब, बुलाएगा वही
जो जनता है हार की हकीकत, इस दौड़ में जीतेगा वही...







