पेट कम करना है, तो अपनाएं यह आसान रास्ता, होगा फायदा

भोपाल।उम्र बढ़ने के साथ वेट लूज करने के लिए जिम, एक्सरसाइज, वॉक जैसे आम तरीके महिलाओं के लिए कारगर नहीं रह जाते। लिहाजा बोन से जुड़ी बीमारियों और डायबिटीज-बीपी की पेशेंट 35 प्लस महिलाओं के लिए फिजियोथैरेपी से वेट कम करने का नया कांसेप्ट शहर में आकार लेने लगा है। सिटी के भोपाल फ्रेक्चर हॉस्पिटल ने फिजियो फिटनेस का यह नया कांसेप्ट शुरू किया है। इसमें वेट कम करने के लिए एक्सरसाइज-वॉक की जगह फिजियोथैरेपी की मदद ली जाती है और बीमारी के मुताबिक डाइट प्लान की जाती है।
कई साल बाद वेट कम
अरेरा कॉलोनी निवासी कविता जैन का वेट डिलेवरी के बाद से कम ही नहीं हो रहा था। 7 साल के इस ड्यूरेशन में उन्होंने एक्सरसाइज की, लेकिन नी और बैक पेन के चलते छोड़ना पड़ा। इसके बाद जिम ज्वॉइन किया पर इससे नी पेन और बढ़ गया। वह कहती हैं डेढ़ महीने पहले मुझे इस कॉन्सेप्ट के बारे में पता चला और मैंने इसे एडॉप्ट किया।
फिजियोथैरेपी में सारी एक्टिविटी बैठकर या लिटा कर की जाती हैं इससे नी-बैक पेन आड़े नहीं आया और 4 किलो वेट कम हो गया। कोलार निवासी मनप्रीत कौर संधू का वेट काफी ज्यादा था। डॉक्टर की सलाह पर वेट कम करने जिम ज्वॉइन किया।
वेट तो कम हुआ, लेकिन गर्दन में पेन होने लगा। चेकअप कराया तो पता चला कि सर्वाइकल की प्राब्लम है, लो बीपी मुझे पहले से ही था। इस तरह मुझे जिम जाना बंद करना पड़ा। कुछ दिन पहले फिजियोथैरेपी से वेट लॉस करना शुरू किया। अब बिना दर्द के वेट कम कर रही हूं और बीपी भी काफी कंट्रोल में आ गया है।
हड्डियों पर नहीं दिया जाता लोड
हॉस्पिटल के ऑथरे रीहेबिलिटेशन एंड पीटी एक्सपर्ट डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना कहते हैं कि 35 की उम्र के बाद महिलाओं की हड्डियां ताकत खोने लगती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस, अर्थराइटिस जैसी बीमारियों के चलते उनके लिए जिम-वॉक जैसे तरीकों से वेट कम करना संभव नहीं होता। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, चेस्ट इंफेक्शन, स्लिप डिस्क आदि के पेशेंट भी हेल्थ रीजन से इन तरीकों को एडॉप्ट नहीं कर पाते। ऐसे में उनकी फिजिकल प्राब्लम को ध्यान में रख फिजियोथैरेपी के टूल्स की मदद से हड्डियों पर बिना लोड दिए उनका वेट कम कराना अच्छा ऑप्शन होता है।
इसके साथ-साथ उनके सभी टेस्ट किए जाते हैं। फिर बीमारी को देखते हुए जिन विटामिंस और प्रोटीन्स की जरूरत होती है उन्हें एड करते हुए डाइट प्लान भी कराया जाता है। जिन महिलाओं को ज्यादा समस्या नहीं होती उन्हें ऐरोबिक्स के ऐसे स्टेप्स कराए जाते हैं जो उनकी हड्डियों पर कम लोड डालें।
ऐसे होती है फिजियो फिटनेस : नॉर्मल वॉक के बजाय स्विस बॉल से लिटाकर वॉकिंग कराते हैं। ट्रेडमिल-साइकिलिंग की बजाय स्विस वॉल से स्पिनिंग कराते हैं। जिम मशीन की बजाय थेरा बैंड्स, थेरा ट्यूब्स का यूज करते हैं। सामान्य ऐरोबिक्स की जगह मेडिकेटेड एरोबिक्स इस्तेमाल किया जाता है। क्रॉस ट्रेनर-ट्विस्टर की जगह रबर ब्रिक्स का इस्तेमाल कराते हैं।






