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मेडिकल अफसरों के चयन में घोटाले का बड़ा खुलासा
आकाश सक्सेना
| May 01, 2012, 05:37AM IST

एमपीपीएससी ने स्वास्थ्य विभाग में रिक्त 1109 चिकित्सा अधिकारी के पदों के लिए 2010 में परीक्षा कराई थी। पीएससी ने योग्य उम्मीदवारों का चयन करके मेरिट सूची स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी, लेकिन विभाग ने नियुक्तियों में गड़बड़ी कर दी। वेटिंग मेरिट लिस्ट में एक से 19 नंबर तक के लोगों का तो चयन विभाग ने कर लिया, लेकिन उसके बाद फिर 45 नंबर वाले की नियुक्ति की गई।
मतलब साफ है कि अधिकारियों ने अपने चहेतों का चयन किया। नियुक्ति से वंचित कुछ उम्मीदवारों ने इस मामले की शिकायत डीबी स्टार टीम से की। टीम ने मामले की पड़ताल की, तो खुलासा हुआ कि स्वास्थ्य विभाग ने नियुक्ति में तो गड़बड़ी की है, साथ ही इस संबंध में आरटीआई के तहत जवाब भी नहीं दिया।
नहीं दिया सूचना के अधिकार के तहत जवाब
जब मेरिट लिस्ट के आधार पर नियुक्ति नहीं हुई, तो एक आवेदक ने संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं में आरटीआई के तहत आवेदन लगाकर यह जानकारी मांगी कि किस आधार पर इन पदों पर नियुक्ति की गई है। मेरिट में क्रमवार उम्मीदवारों के नामों पर विचार क्यों नहीं किया गया? इसके जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने लिखा कि यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग से संबंधित नहीं है। कृपया ये जानकारी लोक सेवा आयोग इंदौर से लें। लोक सेवा आयोग इंदौर ने आरटीआई के तहत दिए जवाब में कहा कि वह पात्र आवेदकों की मेरिट सूची स्वास्थ्य विभाग को भेज चुका है।
ऐसे किया चयनित
मेरिट की वेटिंग सूची में अनुसूचित जाति के 69 आवेदकों के नाम शेष रह गए थे। इनमें से 1 से 19 तक फिर 42, 46 और 50 से 53 सीरियल क्रमांक तक दर्ज आवेदकों को नियुक्ति प्रदान कर दी गई, जबकि इनके बीच सी.क्र. 20 से 41, 43 से 45, 47 से 49 तक के आवेदकों के नामों पर विचार ही नहीं किया गया। इस प्रकार 28 लोगों को नियुक्ति प्रदान की गई।
नहीं होने दी जाएगी गड़बड़ी
अगर मेरिट सूची आई है, तो मेरिट के आधार पर ही नियुक्ति की जानी चाहिए। अब तक इस प्रकार की कोई भी शिकायत हमारे पास नहीं आई है। आपके द्वारा यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। अगर मेरिट सूची की अनदेखी कर नियुक्तियां की गई हैं, तो गलत है। इस प्रकार की कोई भी गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- नरोत्तम मिश्रा, स्वास्थ्य मंत्री





