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एक ऐसी जगह, जहां हर किसी को मिलेगी मानसिक शांति

राजेश चंचल | Jul 12, 2012, 05:14AM IST
 
 


भोपाल। गायत्री शक्ति पीठ परिसर में विभिन्न रोगों से ग्रस्त लोगों को एक्युप्रेशर पद्धति से इलाज मिलेगा। इसके लिए परिसर में आकार ले रहे उपवन में हाई, मिडिल व लो ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए अलग-अलग दानेदार पाथ बनाए गए हैं। साथ ही मानसिक शांति व आध्यात्मिक साधना-उपासना करने के लिए 27 नक्षत्र, 12 राशियों और 9 ग्रहों से जुड़े पौधे पीपल, बरगद, नीम, गूलर व वट आदि के पौधे भी लगाए जा चुके हैं। यहां पिरामिड और वास्तु ज्ञान संबंधी माडल भी होगा, जिससे दिशा और उनसे जुड़े ग्रह-नक्षत्रों की जानकारी मिल सकेगी।

 

गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज हरिद्वार के निर्देश पर बन रहे इस उपवन के निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। ब्लड प्रेशर व अन्य रोगों से ग्रस्त मरीजों का एक्युप्रेशर पद्धति से इलाज करने के लिए अलग-अलग प्रकार के छोटे-बड़े दानेदार टाइल्स लगाकर पाथ बनाए गए हैं। यहां मौजूद चिकित्सक इन पाथों पर चलने की विधि बताएंगे। रोगों के निवारण और आध्यात्मिक साधना के लिए वास्तु, गृह, राशि व नक्षत्र वाटिकाएं बनाई जा रही हैं। यहां फलों व गाजर, करेला, लौकी आदि सब्जियों के जूस का स्टाल भी रहेगा। इनकी बिक्री काफी कम कीमत पर की जाएगी। उपवन सुबह छह से नौ बजे और शाम पांच से रात आठ बजे तक खुला रहेगा।

 

हर्बल गार्डन के रूप में उपवन तैयार करा रहे प्रभारी अमर धाकड़ व दिनेश मालवीय ने बताया कि यहां ऐसे पौधे लगाए जा रहे हैं, जिन पर विभिन्न नक्षत्रों, ग्रहों व राशियों का आधिपत्य हैं। उपवन में लगे सूचना पटल पर ये जानकारियां भी दर्ज रहेंगी कि कौन सी राशि और किस नक्षत्र के लोग किस पेड़ अथवा पौधे को नियमित खाद-पानी देकर सेवा करें और उसके समीप बैठक कर आध्यात्मिक साधना और मंत्र जाप करें। पदाधिकारीद्वय ने बताया कि यहां गायत्री मंत्र की मधुर स्वर लहरियां यहां गुंजायमान रहेंगी।

 

क्या हैं नक्षत्र

 

पं. भंवर लाल शर्मा कहते हैं कि साधारणत: लोग अपनी जन्म राशि के बारे में ही जानते हैं, लेकिन उनका जन्म किस नक्षत्र में हुआ यह कम लोग ही जानते हैं। किसी भी व्यक्ति के जन्म समय में चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वही उसका जन्म नक्षत्र कहलाता है और हर नक्षत्र से पेड़ों का संबंध होता है। पं. प्रहलाद पंड्या का कहना है कि पीपल, नीम, अशोक और वट आदि वृक्ष लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े हुए हैं। पेड़ों में देवताओं का वास होता है।

 

किस पेड़ का कौन से नक्षत्र से संबंध

 

अश्विनी-कुचला, भरणी-आंवला, कृतिका-गूलर, रोहिणी-जामुन, मृग-खैर, आर्त-कदम, पुर्नवसु-बिल्व पत्र, पुष्य-पीपल, अश्लेषा-नागचंपा, मघा-बट, पूर्वा-पलाश, उतरा-पायरी, हस्त-पाई, चित्रा-बिल्व, स्वाति-अर्जुन, अनुराधा-नागकेसर, शताखा-कदंब, पूर्वा भाद्रपा-आम, रेवती-मोह।

 
 
 

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