मानदेय देने के फैसले पर पार्षदों की आपत्ति
भोपाल। सांईबाबा नगर में टंकी ढहने के हादसे के पीडि़तों को अपना एक महीने का मानदेय देने के नगर निगम परिषद के फैसले से पार्षद खफा हैं। उनके मुताबिक पार्षदों की सहमति के बिना मानदेय न दिया जाए। जबकि निगम ने सभी पार्षदों का नवंबर का मानदेय रोक रखा है। उधर, एक दिन की तनख्वाह देने से निगम कर्मचारी भी नाराज हैं।
उन्होंने निगम प्रशासन के इस कदम का विरोध किया है। हाल ही में हुई नगर निगम परिषद की बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के ही पार्षदों ने पीडि़़तों की मदद को अपना एक महीने का मानदेय देने की बात कही थी। तब पार्षदों ने बड़ी संख्या में इसके लिए हामी भरी थी। अब यही पार्षद उन्हें नवंबर माह का मानदेय न मिलने से खासे नाराज हैं। कांग्रेस के पार्षद सीएम पटेल तो इस बात से इतने खफा हो गए कि उन्होंने निगम परिषद में प्रश्न लगाकर पूछा है कि उनका मानदेय क्यों काटा गया। क्या उनसे इसके लिए पूछा गया था?
इस मामले में वार्ड 41 के पार्षद अजीजुद्दीन का कहना है कि निगम यदि हमारा मानदेय दे रहा है तो कम से कम हमारी सहमति तो ले। यदि मानदेय देना ही होगा, तो हम खुद जाकर पीडि़तों को देंगे।
वार्ड 7 के पार्षद शाहिद अली ने बताया कि निगम ने हमसे पूछा ही नहीं, फिर फैसला कैसे ले लिया। इस संबंध में महापौर कृष्णा गौर ने कहा कि परिषद में सबने हामी भरी थी। अब पलट रहे हैं तो गलत है। मैं तो अपना एक महीने का मानदेय दूंगी। नगर निगम कर्मचारी कांग्रेस अध्यक्ष तजीन अहमद के मुताबिक कायदे से जिन कर्मचारियों ने हादसे के वक्त और बाद में जी-तोड़ मेहनत की है, उन्हें इनाम दिया जाना चाहिए था। जब जिला प्रशासन, ननि और शासन ने पीडि़तों को सहायता दी है, तो कर्मचारियों का वेतन काटने का क्या औचित्य है।






