आज कम ही लोग ऐसे मिलते हैं जो ओशो नाम से परिचित न हों। कुछ उन्हें नपसंद करते हैं कुछ उनका सर्मथन तो कुछ अभी तक उन्हें समझ ही नहीं पाए हैं। लेकिन, उन्हें जानता हरकोई है। सर्मथन और नपसंदगी तो जायज़ है पर उन्हें समझ न पाने वालों की कशमकश भी सही है। इसका कारण ओशो के विचित्र विचार हैं। एक भारतीय जो संतों की तरह वेश-भूषा धारण करता है और सेक्स जैसे मुद्दे को भी मेडीटेशन और समाधि से जोड़ता है। ये तरीका कुछ बेहद ही अजीब है।
आईए जानते हैं ओशों के विचारों को जो कहीं ज़िंदगी के सच्चे अर्थ बताते हैं तो कभी अर्थ में ही उलझाते नज़र आते हैं।