गैस पीड़ितों पर ड्रग ट्रायल, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकारा

नई दिल्ली/भोपाल। भोपाल गैस हादसे के पीड़ितों और इंदौर में मरीजों पर अवैध ड्रग ट्रायल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त एतराज जताया है। कोर्ट ने मध्यप्रदेश और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर लोगों को गिनी पिग बनाए जाने के आरोपों पर जवाब देने को कहा है। एक गैरसरकारी संगठन ने जनहित याचिका दायर कर मध्यप्रदेश समेत देशभर में अवैध ड्रग ट्रायल के आरोप लगाए हैं।
सोमवार को इस पर हुई बहस के दौरान जस्टिस आरएम लोढ़ा और अनिल दवे की बेंच ने कहा कि सरकार को कुछ तो जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए। इंसानों को गिनी पिग की तरह इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
याचिका में कहा गया है कि अनुमति लिए बगैर कुछ दवाओं का प्रभाव जांचने के अवैध और अनधिकृत परीक्षणों के दौरान भोपाल गैस हादसे के पीड़ितों और इंदौर सहित देश भर में कई लोगों की मौत हो चुकी है।
याचिका में मांग की गई है कि नागरिक संगठन खासतौर पर ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क के सदस्यों को मिलाकर विशेषज्ञों की समिति बनाई जाए जो देश-विदेश में क्लीनिकल ट्रायल संबंधी प्रावधानों को देखे और दिशानिर्देश तय करने के लिए सिफारिशें दे।
भोपाल मेमोरियल में 13 मृतकों में से 12 गैस पीड़ित
भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में 2004 से 2008 के बीच विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 279 मरीजों पर दवाओं का परीक्षण किया गया है। इनमें से 13 मरीजों की ड्रग ट्रायल के बाद बीमारी बढ़ने से मौत हो गई। मृतकों में से १२ गैस पीड़ित थे। मरीजों पर अवैध तरीके से दवाओं का परीक्षण किए जाने का खुलासा भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन और भोपाल ग्रुप फॉर इनफॉर्मेशन एंड एक्शन के प्रतिनिधियों ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से सूचना का अधिकार के तहत जानकारी लेकर किया था।
चार साल, २क्३१ मौतें, मुआवजा 22 को
ड्रग कंट्रोलर जनरल द्वारा आरटीआई के तहत दी गई जानकारी के मुताबिक देश में ड्रग ट्रायल में चार साल में 2031 मौतें हुईं हैं। इनमें केवल 22 में ही मुआवजा दिया गया है।






