संगठन द्वारा हाल ही में डॉक्टरों को जारी एडवायजरी में कहा गया है कि वे क्लीनिक में आने वाले मरीजों की काउंसलिंग कर उन्हें सिगरेट के दुष्प्रभाव बताएं। डब्लूएचओ ने यह एडवायजरी ब्रेन स्ट्रोक, लंग कैंसर, ब्रेन कैंसर और हार्ट डिसीज को नियंत्रित करने के लिए दी है।
नवोदय कैंसर हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. श्याम अग्रवाल ने बताया कि एक सिगरेट पीने से व्यक्ति के ब्लड में 0.35 मिली ग्राम निकोटिन पहुंच जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
इसी तरह रोजाना 10 सिगरेट पीने पर ब्लड में निकोटिन की मात्रा 3.5 फीसदी हो जाती है। इससे व्यक्ति के ब्लड में निकोटिन का स्तर बढ़ता जाता है और बाद में लंग कैंसर, ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन कैंसर जैसी बीमारियां सामने आती हैं। इसी कारण डब्लूएचओ ने गाइडलाइन जारी की है, ताकि किसी भी तरह की बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल सके।
54 हजार लोगों पर रिसर्च
जवाहर लाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल के ऑन्को सर्जन डॉ. अतुल समैया ने बताया कि आम लोगों के मुकाबले औसतन 10 सिगरेट रोजाना पीने वाले व्यक्ति को लंग कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है।
इसकी पुष्टि नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, अमेरिका के डॉक्टर्स ने 54 हजार स्मोकर्स पर रिसर्च के बाद किया है। रिपोर्ट में डॉक्टरों ने सिगरेट पीने वाले 27 हजार लोगों के सीने के एक्सरे लिए और 27 हजार के सीटी स्कैन। सीटी स्कैन कराने वाले मरीजों के फेफड़ों में कैंसर पहली और दूसरी स्टेज में मिला, जबकि एक्सरे कराने वाले स्मोकर्स में फेफड़े के कैंसर का पता लास्ट स्टेज में चला।
गांधी मेडिकल कॉलेज की पैथालॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. नीलकमल कपूर ने बताया कि ब्लड में निकोटिन की मात्रा शून्य फीसदी होती है। सिगरेट पीने से ब्लड में निकोटिन का स्तर बढ़ता है, जिससे स्मोकर को त्वचा रोग, लंग कैंसर, ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) की शिकायत होती है। डॉ. कपूर के मुताबिक ब्लड में निकोटिन की मात्रा बढ़ने पर व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा होता चला जाता है, जो उसके बीमार होने की ओर इशारा करता है।