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खुशखबरीः विद्यार्थी अब हिंदी में भी लिख सकेंगे आंसर

 
Source: Bhaskar News   |   Last Updated 05:13(18/12/11)
 
 
 
 

सीबीएसई बोर्ड की दसवीं और 12वीं परीक्षाओं में भाषा को छोड़कर बाकी विषयों के उत्तर अंग्रेजी में ही देने होते हैं। प्रश्न हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होते हैं पर उत्तर देने का विकल्प सिर्फ अंग्रेजी में होता है।

 

सीबीएसई बोर्ड ने इस परंपरा में थोड़ा बदलाव किया है। इस सत्र से छात्रों को अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी उत्तर देने की छूट मिल गई है। फिलहाल यह व्यवस्था हॉस्पिटेलिटी और टूरिज्म कोर्स के लिए ही है। यह दोनों नए विषय पिछले सत्र से ही सीबीएसई के साथ जुड़े हैं। इन विषयों पर पिछले वर्ष तक छात्रों के पास सिर्फ अंग्रेजी में उत्तर देने का विकल्प था। इस सत्र से वह हिंदी में भी उत्तर दे सकेंगे।

 

इस फैसले से उन छात्रों का लाभ हुआ जो ग्रामीण या कस्बाई इलाकों से आते हैं। हॉस्पिटेलिटी और टूरिज्म जैसे विषयों पर छात्रों के मौलिक जवाब मिलने जरूरी हैं। यदि यह जवाब छात्र उस भाषा में देंगे जिस भाषा में वह सोचते हैं तो उत्तर शायद बेहतर होगा।

 

बोर्ड ने अलग-अलग जोन को यह भी स्वीकृति दी है कि यदि वह अपने क्षेत्र के अनुसार कोई वोकेशनल कोर्स शुरू करना चाहें तो कर सकते हैं। यह वोकेशनल कोर्स छात्रों और फैकल्टी की सुविधा पर शुरू किए जा सकते हैं। बोर्ड पिछले साल से ही शामिल किए हुए इन दो नए विषयों पर हिंदी में लिखने की छूट देना चाहता था। 2012 की परीक्षाओं में बैठने वाले छात्र हिंदी माध्यम से परीक्षा दे सकेंगे।

 

अनिवार्य भी हो सकते हैं विषय

 

आईपीएस के प्रिंसिपल पीएस कालरा का कहना है, वोकेशनल कोर्स में मास कम्युनिकेशन और हॉस्पिटेलिटी और टूरिज्म के अलावा और भी विषय शामिल किए जा सकते हैं। चूंकि आगे की बढ़ाई इन विषयों पर होती है इसलिए यह विषय अनिवार्य भी किए जा सकते हैं। साल दर साल इस वैकल्पिक विषयों का चयन करने का ट्रेंड बढ़ रहा है।

 

मिली-जुली भाषा में भी दे सकते हैं उत्तर

 

हिंदी के कई शब्द ऐसे होते हैं जिनका अंग्रेजी अनुवाद न सिर्फ सरल होता है बल्कि स्वीकृत भी होता है। इन विषयों का उत्तर देते समय छात्र ऐसा ही कर सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि भाषा आसान वह होती है जो सुनने में आसान लगे।

 

यदि छात्र को किसी हिंदी शब्द की अंग्रेजी टर्मिनोलॉजी सरल जान पड़ रही है तो वह वहां पर अंग्रेजी शब्द का ही इस्तेमाल करे भले ही वह हिंदी में उत्तर दे रहा हो। अध्यापकों को भी ऐसी भाषा में लिखे उत्तर पढ़ने में आसानी होगी। वह बोर्ड को अन्य दूसरे विषयों में भी द्विभाषी उत्तर देने का विकल्प रखने की बात कहते हैं।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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