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इसे कहते हैं संयोग और सहयोग, हो गया 'चमत्कार', बची दो जिंदगी
आशीष दुबे | Aug 05, 2012, 04:15AM IST

ब्लड ग्रुप नहीं मिला तो हुईं निराश
उज्जैन के फ्रीगंज निवासी व्यापारी भूपेंद्र की एक किडनी खराब हो गई थी। 6 माह पहले अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती करवाया गया था। भूपेंद्र को किडनी देने के लिए उनके पिता निर्मल व पत्नी अंजू तैयार थे। लेकिन, पिता को शुगर होने और पत्नी का ब्लड ग्रुप (एबी-पॉजिटिव) पति भूपेंद्र के ब्लड ग्रुप (बी-पॉजिटिव) से नहीं मिला।
दर्द बांटा तो मिलीं खुशियां
डॉक्टरों ने अंजू से जल्द से जल्द भूपेंद्र के लिए डोनर की व्यवस्था करने को कहा। बकौल अंजू निराश होकर जब वे अस्पताल से नीचे उतर रही थीं तो उसी दौरान एक अनजान व्यक्तिप्रह्लाद सिंह की उनसे मुलाकात हो गई। जयपुर के प्रह्लाद के बेटे हेमंत को भी किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। बातचीत में दोनों ने अपना दर्द साझा किया तो अंजू को पता चला कि प्रह्लाद का ब्लड ग्रुप बी-पॉजिटिव और हेमंत का एबी-पॉजिटिव है। तब अंजू ने प्रह्लाद से निवेदन किया कि अगर वे उनके पति भूपेंद्र को किडनी दे दें तो वो उनके पुत्र हेमंत को किडनी दे सकती हैं। बस फिर क्या था, संयोग से बने इस सहयोग पर डॉक्टरों ने भी जांच के बाद ट्रांसप्लांटेशन की मुहर लगा दी।






