ग्वालियर। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गुरुवार को कक्षा तीन के छात्र सात वर्षीय अंशुमन सिंह तोमर की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने हाईस्कूल की परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का आग्रह किया था। न्यायालय ने कहा कि इस कम उम्र में यदि अंशुमन को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती है तो उस पर पढ़ाई का मानसिक दबाव पड़ेगा। इससे उसके शारीरिक विकास पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए उसका आग्रह स्वीकार नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति एनके मोदी की बेंच में जिला शिक्षाधिकारी मोहर सिंह सिकरवार ने अंशुमन के मानसिक और शैक्षणिक टेस्ट की रिपोर्ट पेश की। अलग-अलग विषयों के छह व्याख्याताओं के पैनल ने गुरुवार को चार घंटे तक अंशुमन का टेस्ट लेकर यह रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें कोई दो राय नहीं कि अंशुमन के पास कुशाग्र बौद्धिक क्षमता है, लेकिन उसे हाईस्कूल की पढ़ाई की सभी जानकारियां नहीं हैं। टेस्ट में अंशुमन को असफल करार दिया गया।
अंशुमन के अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह धाकड़ ने दलील दी कि एक साथ सभी विषयों के टेस्ट लेकर संपूर्ण योग्यता का आकलन नहीं किया जा सकता। स्कूल और कॉलेज स्तर के पाठ्यक्रमों में अगल-अलग विषयों की परीक्षाएं अलग-अलग दिन रखी जाती हैं, लेकिन सभी विषयों के विशेषज्ञों ने एक ही दिन तमाम तरह के सवाल कर अंशुमन पर दबाव बना दिया। उप शासकीय अधिवक्ता संगीता पचौरी ने शासन का पक्ष रखा।
न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अंशुमन कम उम्र में अधिक जानकारी रखता है, दिमाग से तेज है, लेकिन उसे हाईस्कूल परीक्षा में बैठने दिया जाता है तो उस पर कम उम्र में अधिक मानसिक दबाव पड़ेगा, इससे उसका शारीरिक विकास प्रभावित होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में उसे हाईस्कूल परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
फैसले के खिलाफ करेंगे अपील: याचिका खारिज होने के बाद अंशुमन के अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह धाकड़ ने कहा कि अंशुमन ने सिर्फ हाईस्कूल परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी है, पास होने के बाद आगे की कक्षा में प्रमोट होने की नहीं। उन्होंने कहा कि एकल बेंच के फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील की जाएगी।
17 प्रश्नों में 10 के उत्तर गलत दिए छह व्याख्याताओं के पैनल ने अंशुमन से हाईस्कूल के कोर्स से कुल 17 प्रश्न पूछे थे। उसने इनमें सात के उत्तर सही व दस के उत्तर गलत दिए। उसने संस्कृत के दो प्रश्नों का सही और एक का गलत उत्तर दिया। विज्ञान विषय के एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं दे सका। सामाजिक विज्ञान में दो प्रश्नों में से एक का गलत उत्तर दिया। गणित के तीन प्रश्नों में से एक ही हल कर सका, वह भी अधूरा। हिंदी विषय में एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं दे सका। अंग्रेजी के दो प्रश्नों का सही उत्तर दिया तथा छह प्रश्न छोड़ दिए।