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पुजारी ने पुरातत्वविदों को दी मात!, खुदाई में निकलवाया नौंवी सदी का मंदिर

bhaskar news | Jul 22, 2012, 01:28AM IST
 
 

हरेकृष्ण दुबौलिया. ग्वालियर. मितावली, पड़ावली और बटेसर से निकली पुरा संपदा के बाद हाल ही में शनिश्चरा स्थित ऐतिहासिक शनिदेव मंदिर से चंद कदमों की दूरी पर टीले में दबे नौवीं सदी के मंदिर ने आकार लेना शुरू कर दिया है। इसमें बनी प्रतिमाओं को पुरातत्ववेत्ता नागर शैली की बता रहे हैं।

ग्राम ऐंती स्थित शनि पर्वत के आसपास के क्षेत्र में ऐतिहासिक अवशेषों का निकलना अब भी जारी है। तीन वर्ष पहले इससे कुछ दूरी पर खुदाई कराने आई पुरातत्ववेत्ताओं की टीम ने यहां नालंदा और तक्षशिला से भी पुराना शिक्षा केंद्र निकलने का अनुमान लगाया था।

हालांकि उसके बाद से खुदाई का काम बंद हो गया। हाल ही में शनि मंदिर के पुजारी शिवराम त्यागी द्वारा कराई गई खुदाई में कई खंडित एवं साबुत अवस्था में नागर शैली के विशालकाय मंदिर के भग्नावशेष भी मिले हैं।

आध्यात्मिक केंद्र होने के संकेत

फोटोग्राफ देखकर पता चलता है कि मंदिर के भग्नावशेष नौंवी-दसवीं शताब्दी के हैं। मंदिर का आधार खजुराहो मंदिरों के समान है। मंदिर के आधार के बाहरी ढांचे पर ब्रह्मा की मूर्ति है। ध्यानस्थ शिव की भी प्रतिमा यहां मिली है।

शनि पर्वत की पहाड़ी के उत्तरी हिस्से में बटेसर मंदिर समूह है, यहां 80 फीसदी मंदिर पूर्ण एवं 20 फीसदी मंदिर अधूरे निर्मित हैं। कुछ मंदिरों पर सहस्त्र दल कमल नहीं हैं, जो यह संकेत देते हैं कि छठी से दसवीं शताब्दी तक यह क्षेत्र धर्म,आध्यात्म एवं कला शिक्षा का केंद्र रहा होगा।

- रमाकांत चतुर्वेदी
पुरातत्वविद् एवं इतिहासविद
 
 
 

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